Uncle ki gand mari
मैं अपना शहर छोड़ कर जयपुर शिफ्ट हुआ था.
कुछ ही दिनों में जयपुर में मैं सैट हो गया था.
मेरे मकान मालिक काफी अच्छे स्वभाव के हैं.
मैं अक्सर उनके पास बैठ कर बातें कर लिया करता था.
कुछ ही दिन बीते कि उनके एक दोस्त अजय अंकल भी उनके घर के बाजू वाले घर में रहने आ गए.
दरअसल बाजू वाला मकान अजय अंकल का ही है और उनके घर के कुछ कमरों को मेरे मकान मालिक ही किराए पर चढ़ाते हैं.
अजय अंकल की फैमिली हैदराबाद में रहती है. वे यहां अपनी प्रॉपर्टी के काम और कुछ कोर्ट के काम के हिसाब से दो महीने यहीं रुकने के लिए आए थे.
शुरू में उनकी पत्नी भी आई थीं पर वे कुछ ही दिन में कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वापस हैदराबाद चली गईं.
अजय अंकल भी मुझसे बातें करने लगे थे.
उनके बात करने का तरीका मुझे काफी अच्छा लगता था.
वे रात में मुझे व्हाट्सएप पर मैसेज कर बात करने लगे थे.
शुरू में मुझे लगा कि अंकल अकेले रहते हैं, तो शायद उन्हें बात करने में अच्छा लगता हो.
वे मुझसे इधर उधर की बातें कर लेते थे.
मैं भी उनके साथ थोड़ी बातें कर लेता था.
एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि वे बाहर जा रहे हैं, देर से आएंगे. घर का ध्यान रखने के लिए मैं उनके घर पर रुक जाऊं.
मैंने बहुत ज्यादा नहीं सोचा और शाम होते उनके घर चला गया.
जब मैंने उनसे खाना का पूछा.
तो उन्होंने कहा कि मैं खाना बाहर से लेकर आऊंगा तो तुम खाना आदि का ज्यादा कुछ न सोचना.
मैंने भी हां भर दी.
उनके जाने के बाद टीवी शुरू करके बैठ गया और थोड़ी देर में मेरी आंख लग गई.
तभी मुझे सपना आया कि अंकल नहा कर तौलिया लपेट कर मेरे पास आए और धीरे से मेरा हाथ खुद के खड़े लंड से पर ले लिया.
मैं भी आराम से उनका लंड सहलाने लगा.
उनका लंड काफी मोटा था.
मुझसे रहा नहीं गया और मैंने तौलिया खोल कर उनके लंड को देखा.
मोटा लंड देख कर मैंने सीधा मुँह में लपक लिया.
अब वे मेरे ऊपर छा गए.
उनका पूरा लंड मेरे मुँह में था.
मैं उसे भरपूर स्वाद से लिए चूसे जा रहा था.
इतने में फोन बजा और मेरा सपना टूट गया.
यह अजय अंकल का फोन था.
वे कह रहे थे कि दस मिनट में आ जाएंगे.
मैंने मुँह धोया और गेट खोल कर उनके आने का इंतजार करने लगा.
बाहर काफी तेज सर्द हवा चल रही थी.
उसी वक्त अंकल आ गए और वे जल्दी से अन्दर आ गए.
मैं अपने सपने के चलते उनको थोड़ी कामुक नज़रों से देखने लगा.
अंकल काफी मस्त थे.
उनका जिस्म भी काफी भरा हुआ था.
मतलब आप यूं समझो कि दस मिनट नहीं लगे और मेरी नीयत उनके लिए खराब होने लगी.
मैं अब कैसे भी उनका लंड अपनी गांड के अन्दर घुसवाना चाहता था.
अंकल ने शायद ड्रिंक की हुई थी.
उन्होंने खाना खोला और सर्व किया.
हम दोनों ने खाना खाया.
उसी दरमियान मैंने अंकल से उनकी फैमिली और वाइफ के बारे में पूछा.
उन्होंने बोला- सब ठीक हैं.
अब उन्होंने मुझसे पूछा कि तेरी कोई गर्लफ्रेंड बनी यहां?
मैंने बोला- नहीं अंकल, मुझे यह सब पसंद नहीं है.
अंकल बोले- फिर क्या लड़के पसंद हैं?
मैंने अंकल की तरफ देखा और सकपका सा गया.
मेरे मन में तो आया था कि बोल दूँ कि मुझे आप पसंद आ गए हो.
वे हंसने लगे और मैं भी हंस दिया.
अंकल ने कहा- ठंड बहुत है और रात भी हो गई है. तू आज यहीं सो जा!
मैं भी शायद यही चाहता था तो फट से मान गया.
अंकल ने कहा- उस तरफ रूम है, फ्रेश होकर सो जाना. मैं थोड़ा टीवी देख कर आऊंगा.
मैं कमरे में चला गया और अंकल के आने का इंतजार करने लगा.
अजय अंकल बहुत इंतजार करवा रहे थे.
फिर वे आए और मेरे पास ही सो गए.
उन्होंने मुझे आवाज भी दी कि सो गया क्या?
पर मैंने कोई जवाब नहीं दिया.
उन्होंने मेरी गांड पर हाथ धर दिया और बोले- अरे इतनी जल्दी सो गए?
मैंने कोई हरक़त नहीं की.
थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि वे फोन में पोर्न देख रहे थे.
उन्होंने मेरी तरफ देखा तो उन्हें पता चल गया कि मैं जाग गया हूँ.
उन्होंने फोन बंद कर दिया और मुझसे पूछा- क्या हुआ … नींद नहीं आ रही क्या?
मैंने कहा- मुझे जींस में सोने की आदत नहीं है … और लोअर मैं लाया नहीं!
तो वे बोले- अरे, मेरे पास भी एक ही लोवर है … और दूसरा धोकर रखा है.
मैं कुछ नहीं बोला.
उन्होंने वापस कहा- कबर्ड में देख … शायद कुछ पहनने का हो.
मैंने खोला तो उसमें अंकल के जींस शर्ट या टी-शर्ट थे.
उन्होंने मुझसे कहा कि अंडरवियर में सो जा!
मैं बोला- नहीं अंकल … उसमें ठंड लगती है.
मैंने दूसरा कबर्ड खोला, तो उसमें शायद आंटी के कुछ ब्लाउज और पेटीकोट थे, जो यहां रह गए थे या वे यहीं रखती थीं.
अंकल ने कहा- यही पहन ले, नाड़े वाले हैं, तो तुझे आ भी जाएंगे.
मैंने कहा- ये कैसे पहन लूं अंकल … ये तो औरतों के पहनने के हैं!
वे बोले- तो तुझे कौन सा बाहर जाना है, सोना ही तो है, पहन ले यार.
मैंने कबर्ड को बंद किया और ऐसे ही सोने की कोशिश की.
एक घंटा बाद भी मुझे नींद नहीं आ रही थी.
अंकल के सोने के बाद मैंने जींस निकाली चुपके से पेटीकोट पहन कर आकर सो गया.
उस पेटीकोट में मैं पूरा कंफर्टेबल था पर इसे पहनने से मेरे अन्दर की हवस से भरी औरत जाग गई थी.
अब उस चुदासी औरत को अंकल के लंड पर उछलना था.
हर पल मेरा होश खो रहा था.
मैंने अपना हाथ अंकल के लंड पर घुमाना शुरू कर दिया.
थोड़ी देर में मैंने कंट्रोल किया और दूसरी तरफ मुँह करके सो गया.
थोड़ी ही देर में अजय अंकल ने मेरी कमर पकड़ी और मुझे अपने पास खींच लिया.
उनका तना हुआ लंड मेरी गांड से टकराने लगा.
लंड का अहसास पाते ही एक जोर का करंट लगा और मेरे पूरे तन बदन में दौड़ गया.
मेरी सांसें तेज हो गईं और अंकल ने पेटीकोट को थोड़ा ऊपर करके मेरी अंडरवियर नीचे सरका दी.
अब पेटीकोट के ऊपर से अजय अंकल का लंड मेरी गांड की दरार पर सटा हुआ था.
मैं तेज तेज आहें भर रहा था और अजय अंकल के हाथ मेरी छाती पर घूम रहे थे.
मैं अब एक चुदासी रांड बन गई थी और मैं खुद को पूरा अजय के हवाले कर चुकी थी.
अब मेरी गांड अंकल के लंड का स्वागत करना चाहती थी.
मैंने अपना हाथ उनके लंड पर रख दिया और सहलाने लगी.
अंकल का लंड काफी बड़ा और मोटा था.
मैंने हल्के हल्के हाथों से लंड को मसलना शुरू कर दिया.
मैं अभी भी किसी गर्म औरत की तरह आहें भर रही थी.
मेरी धड़कनें तेज हो गयी थीं.
कुछ ही दिनों में जयपुर में मैं सैट हो गया था.
मेरे मकान मालिक काफी अच्छे स्वभाव के हैं.
मैं अक्सर उनके पास बैठ कर बातें कर लिया करता था.
कुछ ही दिन बीते कि उनके एक दोस्त अजय अंकल भी उनके घर के बाजू वाले घर में रहने आ गए.
दरअसल बाजू वाला मकान अजय अंकल का ही है और उनके घर के कुछ कमरों को मेरे मकान मालिक ही किराए पर चढ़ाते हैं.
अजय अंकल की फैमिली हैदराबाद में रहती है. वे यहां अपनी प्रॉपर्टी के काम और कुछ कोर्ट के काम के हिसाब से दो महीने यहीं रुकने के लिए आए थे.
शुरू में उनकी पत्नी भी आई थीं पर वे कुछ ही दिन में कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वापस हैदराबाद चली गईं.
अजय अंकल भी मुझसे बातें करने लगे थे.
उनके बात करने का तरीका मुझे काफी अच्छा लगता था.
वे रात में मुझे व्हाट्सएप पर मैसेज कर बात करने लगे थे.
शुरू में मुझे लगा कि अंकल अकेले रहते हैं, तो शायद उन्हें बात करने में अच्छा लगता हो.
वे मुझसे इधर उधर की बातें कर लेते थे.
मैं भी उनके साथ थोड़ी बातें कर लेता था.
एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि वे बाहर जा रहे हैं, देर से आएंगे. घर का ध्यान रखने के लिए मैं उनके घर पर रुक जाऊं.
मैंने बहुत ज्यादा नहीं सोचा और शाम होते उनके घर चला गया.
जब मैंने उनसे खाना का पूछा.
तो उन्होंने कहा कि मैं खाना बाहर से लेकर आऊंगा तो तुम खाना आदि का ज्यादा कुछ न सोचना.
मैंने भी हां भर दी.
उनके जाने के बाद टीवी शुरू करके बैठ गया और थोड़ी देर में मेरी आंख लग गई.
तभी मुझे सपना आया कि अंकल नहा कर तौलिया लपेट कर मेरे पास आए और धीरे से मेरा हाथ खुद के खड़े लंड से पर ले लिया.
मैं भी आराम से उनका लंड सहलाने लगा.
उनका लंड काफी मोटा था.
मुझसे रहा नहीं गया और मैंने तौलिया खोल कर उनके लंड को देखा.
मोटा लंड देख कर मैंने सीधा मुँह में लपक लिया.
अब वे मेरे ऊपर छा गए.
उनका पूरा लंड मेरे मुँह में था.
मैं उसे भरपूर स्वाद से लिए चूसे जा रहा था.
इतने में फोन बजा और मेरा सपना टूट गया.
यह अजय अंकल का फोन था.
वे कह रहे थे कि दस मिनट में आ जाएंगे.
मैंने मुँह धोया और गेट खोल कर उनके आने का इंतजार करने लगा.
बाहर काफी तेज सर्द हवा चल रही थी.
उसी वक्त अंकल आ गए और वे जल्दी से अन्दर आ गए.
मैं अपने सपने के चलते उनको थोड़ी कामुक नज़रों से देखने लगा.
अंकल काफी मस्त थे.
उनका जिस्म भी काफी भरा हुआ था.
मतलब आप यूं समझो कि दस मिनट नहीं लगे और मेरी नीयत उनके लिए खराब होने लगी.
मैं अब कैसे भी उनका लंड अपनी गांड के अन्दर घुसवाना चाहता था.
अंकल ने शायद ड्रिंक की हुई थी.
उन्होंने खाना खोला और सर्व किया.
हम दोनों ने खाना खाया.
उसी दरमियान मैंने अंकल से उनकी फैमिली और वाइफ के बारे में पूछा.
उन्होंने बोला- सब ठीक हैं.
अब उन्होंने मुझसे पूछा कि तेरी कोई गर्लफ्रेंड बनी यहां?
मैंने बोला- नहीं अंकल, मुझे यह सब पसंद नहीं है.
अंकल बोले- फिर क्या लड़के पसंद हैं?
मैंने अंकल की तरफ देखा और सकपका सा गया.
मेरे मन में तो आया था कि बोल दूँ कि मुझे आप पसंद आ गए हो.
वे हंसने लगे और मैं भी हंस दिया.
अंकल ने कहा- ठंड बहुत है और रात भी हो गई है. तू आज यहीं सो जा!
मैं भी शायद यही चाहता था तो फट से मान गया.
अंकल ने कहा- उस तरफ रूम है, फ्रेश होकर सो जाना. मैं थोड़ा टीवी देख कर आऊंगा.
मैं कमरे में चला गया और अंकल के आने का इंतजार करने लगा.
अजय अंकल बहुत इंतजार करवा रहे थे.
फिर वे आए और मेरे पास ही सो गए.
उन्होंने मुझे आवाज भी दी कि सो गया क्या?
पर मैंने कोई जवाब नहीं दिया.
उन्होंने मेरी गांड पर हाथ धर दिया और बोले- अरे इतनी जल्दी सो गए?
मैंने कोई हरक़त नहीं की.
थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि वे फोन में पोर्न देख रहे थे.
उन्होंने मेरी तरफ देखा तो उन्हें पता चल गया कि मैं जाग गया हूँ.
उन्होंने फोन बंद कर दिया और मुझसे पूछा- क्या हुआ … नींद नहीं आ रही क्या?
मैंने कहा- मुझे जींस में सोने की आदत नहीं है … और लोअर मैं लाया नहीं!
तो वे बोले- अरे, मेरे पास भी एक ही लोवर है … और दूसरा धोकर रखा है.
मैं कुछ नहीं बोला.
उन्होंने वापस कहा- कबर्ड में देख … शायद कुछ पहनने का हो.
मैंने खोला तो उसमें अंकल के जींस शर्ट या टी-शर्ट थे.
उन्होंने मुझसे कहा कि अंडरवियर में सो जा!
मैं बोला- नहीं अंकल … उसमें ठंड लगती है.
मैंने दूसरा कबर्ड खोला, तो उसमें शायद आंटी के कुछ ब्लाउज और पेटीकोट थे, जो यहां रह गए थे या वे यहीं रखती थीं.
अंकल ने कहा- यही पहन ले, नाड़े वाले हैं, तो तुझे आ भी जाएंगे.
मैंने कहा- ये कैसे पहन लूं अंकल … ये तो औरतों के पहनने के हैं!
वे बोले- तो तुझे कौन सा बाहर जाना है, सोना ही तो है, पहन ले यार.
मैंने कबर्ड को बंद किया और ऐसे ही सोने की कोशिश की.
एक घंटा बाद भी मुझे नींद नहीं आ रही थी.
अंकल के सोने के बाद मैंने जींस निकाली चुपके से पेटीकोट पहन कर आकर सो गया.
उस पेटीकोट में मैं पूरा कंफर्टेबल था पर इसे पहनने से मेरे अन्दर की हवस से भरी औरत जाग गई थी.
अब उस चुदासी औरत को अंकल के लंड पर उछलना था.
हर पल मेरा होश खो रहा था.
मैंने अपना हाथ अंकल के लंड पर घुमाना शुरू कर दिया.
थोड़ी देर में मैंने कंट्रोल किया और दूसरी तरफ मुँह करके सो गया.
थोड़ी ही देर में अजय अंकल ने मेरी कमर पकड़ी और मुझे अपने पास खींच लिया.
उनका तना हुआ लंड मेरी गांड से टकराने लगा.
लंड का अहसास पाते ही एक जोर का करंट लगा और मेरे पूरे तन बदन में दौड़ गया.
मेरी सांसें तेज हो गईं और अंकल ने पेटीकोट को थोड़ा ऊपर करके मेरी अंडरवियर नीचे सरका दी.
अब पेटीकोट के ऊपर से अजय अंकल का लंड मेरी गांड की दरार पर सटा हुआ था.
मैं तेज तेज आहें भर रहा था और अजय अंकल के हाथ मेरी छाती पर घूम रहे थे.
मैं अब एक चुदासी रांड बन गई थी और मैं खुद को पूरा अजय के हवाले कर चुकी थी.
अब मेरी गांड अंकल के लंड का स्वागत करना चाहती थी.
मैंने अपना हाथ उनके लंड पर रख दिया और सहलाने लगी.
अंकल का लंड काफी बड़ा और मोटा था.
मैंने हल्के हल्के हाथों से लंड को मसलना शुरू कर दिया.
मैं अभी भी किसी गर्म औरत की तरह आहें भर रही थी.
मेरी धड़कनें तेज हो गयी थीं.
5ヶ月前