Panchar wale se gand marwai part one

पंचर बनाने वाले से गांड मरवाई ...
बात उन् दिनों की है जब मेरी उम्र लगभग २५ वर्ष रही होगी मै अपने घर से लगभग २५ किलो मीटर दूर रोज अपनी मोटर साईकिल से जब करने जाता था ,सुबह ७ बजे निकलता था और रात ९ बजे लौटता ! मेरी शादी हो चुकी थी ,पर दोस्तों मुझे लडको की गांड मारना और अगर लंड पसंद आ जाये तो गांड मरवाने में भी कोई दिक्कत नहीं होती है, कहने का मतलब मै सेक्स को हर हल में एन्जॉय करता हू ,एक बार की मै रात को फैक्ट्री से वापिस रात के लगभग नौ बजे वापश आ रहा था की मेरी मोटर साईकिल रस्ते में पंचर हो गई और आस पास कही कोई पंचर बनाने वाला नहीं था , मै अपनी गाड़ी खिचता हुआ हाई वे पे किनारे किनारे आगे बाधा क्युकी मै वह मोटर साईकिल छोड भी नहीं सकता था ,आसपास कोई बस्ती या घर भी नहीं था . लगभग ३ किलोमीटर गाड़ी खिचने के बाद एक ढाबे के किनारे एक पंचर वाले की दुकान पे पंहुचा तब तक रात के ११ बज चुके थे ! मैंने वह गाड़ी खड़ी की और थका हुआ था तो उसी पंचर वाले के यहाँ चारपाई पड़ी थी उसमे बैठ गया पंचर वाला आस पास कही दिखा नहीं , तो मै उसी चारपाई पर लेटकर उसका इंतजार करने लगा ,पंचर वाले ने अपनी दुकान अक्क छोटी सी झोपड़ी बनाकर रखीं हुई थी ,और चारपाई झोपड़ी के बहार पड़ी थी ,बारिश के दिन थे थोड़ी देर में हलकी बारिश शुरू हो गई, मैंने चारपाई उठाकर झोपड़ी में डाल ली और उसपर मै लेट गया , मै थका तो था ही मुझे पता नहीं कब नींद आ गई ,बारिश हो ही रही थी और ठंडी हवा भी चल रही थी मै न जाने कब तक सोता रहा ,जब नींद खुली तो देखा अपनी घडी में रात के एक बजे थे ,मेरी नजर आसपास घूमी तो एक बीस साल का लड़का मेरी गाड़ी का पंचर बना चुका था और बैठ कर बीडी पी रहा था, मैंने भी अपनी सिगरेट सुलगाई और पिने लगा उससे पुचा की कितने पंचर निकले और उसने बनाते समय मुझे जगाया क्यों नहीं , तो वो लड़का बोला बाबूजी आप बहुत गहरी नींद में थे तो मैंने सोचा आये तो पंचर बनवाने ही है पहले पंचर बनाता हू हो सकता है तब तक आप जग जाओ, और देखिये आप जाग ही गए गाड़ी बनते ही ,पर तुरंत ही बारिश फिर शुरू हो गई , मै बहुत बुरा फंसा था ,घर अभी लगभग १५ किलो मीटर दूर था और मेरे पास कोई रेनकोट भी नहीं था , मैंने रुक कर इंतजार करना उचित समझा १ लड़के को उसके पंचर बनाने के पैसे दिए और बोला ढाबे से चाय ले आये , वो ५ मिनिट में चाय लेकर लौटा हमलोगों ने चाय पी,और बाते करते रहे इधर उधर की, तभी मेरे कमीने दिमाग में आईडिया आया की क्यों न इसकी गांड मरी जाये जब तक मै यहाँ फंसा हू कुछ मस्ती ही हो जायेगी! मैंने उसको अपने पास बुलाया और कहा यही चारपाई पे क्यों नहीं बैठते हो वह इतनी दूर बैठे हो , ये तो तुम्हारी चारपाई है तुम मालिक हो इसके. वो बोला नहीं बाबूजी आपलोग बड़े आदमी है आपके पास मै कैसे बराबर बैठ शकता हू. मैंने उसको समझ बुझाकर अपने पास चारपाई पे बुला लिया और न जाने क्या हुआ तुरंत ही लाइट भी चली गई ,जो उसके यहाँ एक बल्ब जल रहा था वो भी बुझ गया , वो उठने लगा की मोमबत्ती जला दे पर मैंने मन कर दिया की अभी यहाँ लाइट की किसको जरुरत है इतनी रात को वो चुप चाप बैठे उधर ढाबे पे भी अँधेरा हो गया था. वह लोगो ने एक दो मोमबत्ती जला दी थी. पर इतनी दुरी थी की हमलोग क्या कर रहे है कोई नहीं समझ सकता था १ अब मेरा घर जाने का इरादा गायब था और बस किसी तरह उस लौंडे को पटाकर उसकी गांड मरने का था. मै अँधेरे में सरककर उसके पास हो गया ,और एक हाथ उसकी जांघ पे रखा और बाते करने लगा इधर उधर की उसके परिवार की कहा का रहने वाला है ये सब और साथ ही साथ अपना हाथ थोडा थोडा उसके लंड की तरफ भी बढाता जा रहा था , जब लगभग ४ इंच की उसके लंड और मेरे हाथ की दुरी रही होगी मैंने उससे कहा की “यार सुना है इस ढाबे पे चुदाई होती है ,लड़किया भी मिलती है “ मेरा मकशद अब सेक्सी बाते करके उसके लंड को खड़ा करना था. वो बोला” नहीं बाबूजी यहाँ तो ऐसी कोई बात नहीं है ,हा कभी कभी बड़े लोग अपनी कार में लड़की लेकर आते है और कमरा वगैरा लेना चाहते है तो ढाबे के मालिक का पास के बाग में ४ कमरे का घर बना है वह सब इंतजाम रहता है वाही वो किराये में दे देते है लोग दो चार घंटे रुक कर चले जाते है! मैंने कहा “ की तुम्हारा दिल जब करता है चुत चोदने का तो तुम क्या करते हो” और इतबा कह कर मैंने अपने हाथ से उसका लंड पकड़ कर दबाया और हाथ वाही चरखा रहने दिया , वो अँधेरे में ही थोडा शरमाया और बोलाक” साहब मेरा तो घर बिहार में में है इतनी दूर पड़ा हू यहाँ अगर चुत के चक्कर में पडूंगा तो क्या कमाऊंगा क्या खाऊंगा और क्या घर ले जाऊंगा. देखो जंगल में पड़ा हू , कोई पंगा हो गया तो यहाँ कोई बचने वाला भी नहीं “ ये सब कहते कहते भी उसके लंड में थोड़ी सी जान आने लगी थी मैंने फिर उसका लंड पैंट के ऊपर से ही दबाया और कहा” की फिर इस पप्पू को कैसे शांत करते हो “ इतना कहते ही उसका लंड झटका खाया और उसने अपने लंड से मेरा हाथ उठाते हुए कहा की “जाने दो बाबूजी आप ये सब बाते करके चले जाओगे और मेरी नींद हरम हो जायेगी “ मैंने फिर से उसके लंड पे हाथ रखा और कहा” यार चल नहीं जाऊंगा तेरा पानी निकल कर ही जाऊंगा “ उसमे क्या है हम लोग मर्द है ये बाते तो कर सकते है “ और उसको और गरम करने के लिए कहा की मेरा तो जब मन करता है मै मुठ मार के गिरा देता हू , या जब बीबी का महीना आने लगता है तब उससे भी मुठ मरवाता हू” और उसके लंड को मैंने पूरी तरह से अपने हाथो से पैंट के ऊपर से ही पकड़ लिया ! अब वो गरम तो हो चुका था और लंड का जूस भी निकलना चाह्ता था ऐसा मुझे लगा , मैंने उसको और गरम करते हुए कहा “ यार तेरा लंड तो बड़ा मस्त लग रहा है ऊपर से निकल न जरा देखू तो की बिहारी लंड कैसे होते है’ वो शर्माता हुआ “बोला जाने दो” बाबूजी और फिर से मेरा हाथ तपने लंड से हटा दिया . तो मैंने कहा “यार अगर तेरे जैसा मेरा लंड होता तो न जाने कितनी लौंडिया छोड चुका होता” और “तू दिखने में नखरे कर रहा है जैसे मै कोई लड़की हू” और फिर से मैंने उसके लंड को अबकी बार ऐसा पकड़ा की वो हटाना भी चाहे तो हटे न, और अपनी मुट्ठी में लेकर उसको हल्का हल्का रगड़ने भी लगा वो अब् पुरे शबाब में आ चुका था ! मैंने दूसरे हाथ से उसके पैंट की चैन खोली और उसका लंड बहार निकला ,वास्तव में उसका लंड ७” का मोटा सा कटा हुआ जबरदस्त लंड था, मैने उससे पुछा की वो मुस्लिम है क्या वो बोला हा, ये मेरे जीवन का पहला मुस्लिम कटा हुआ लंड मेरे हाथ में था और ये सब करते हुए कब मेरा लंड खड़ा हो गया मुझे पता ही नहीं चला ,मैंने उससे कहा “ की यार तेरा लंड इतना मस्त है और इसको देख कर ही मेरा लंड खड़ा हो गया अगर तुम बुरा माँ मनो तो मै यही मुठ मार लू और तुमको भी मुठ मार दू” वो कुछ नहीं बोला बस हलकी हलकी उह्ह उह्ह की आवाज़ निकल रहा था ,मैंने उसको हल्का सा धक्का देकर चारपाई पे पिता दिया और मैंने अपना लंड भी दूसरे हाथ से निकल कर सहलाना शुरू किया, वो चुप चाप ऊई ऊई कर रहा था और मै उसके लंड से जो प्री कम निकल रहा था उसको ही उसके टोपे पे लपेट कर टोपे को हल्का हल्का मसाज दे रहा था , अभी मैंने धीर धीरे पोजीसन लेकर अपना लंड उसके हाथ के पास करके बार बार हल्का स्पर्श करवा रहा था. ऐसा करते करते उसने मेरे लंड की आखिर में पकड़ ही लिया और मुठी में लेकर जोर से दबाया , मै आनंद के सागर में गोते लगाने लगा, पर अभी मेरा मकशद बहुत दूर था मुझे उसकी गांड मारनी थी , लगभग ५ मिनिट मै हलके हाथ से उसके लंड को मसाज देने के बाद बोला “ यार तेरा लंड चूसने के लायक है अगर तुम्हे कोई दिक्कत न हो तो मै इसको चूस लू , वो चुप चाप किसी दूसरी दुनिया की शैर कर रहा था , मैंने उसके लंड को अपने मुह में भर लिया पर उसका लंड इतना बड़ा था की मेरे मुह में पूरा नहीं आया पर मै जितना अंदर तक लेकर चूस सकता था उतना लेकर चूसना शुरू किया ,अब उसने भी मेरे लंड को हल्का हल्का सहलाना शुरू किया मै तो अपनी प्लानिंग के हिसाब से उसको तैयार कर रहा था पर वो बेचारा नहीं जानता था की मै अभी उसी का शिकार कर रहा हू , मै उसके लंड को चूसता जा रहा था और उसकी पैंट को खोल कर निचे खिचता जा रहा था ,वो अब इस समय इस स्थिति में नहीं था की विरोध करे ,मैंने उसकी पैंट और जांघिया दोनों निकल दी, उसकी बड़ी बड़ी झांटे थी लगता था की उसने शालो से इनको नहीं कटा है , मै लंड को चूसते हुए उसके गोलियों को ही हलके हाथ से मसल देता था , वो शीश्कारियां ले रहा था और जब लंड मेरे मुह से निकलने वाला होता तो गांड उठाकर धक्का लगा कर फिर मुह में पूरा डाल देता , मैंने उसके दोनों पैर उठाकर उसकी गोलियों को भी अच्छे से चाटा और धीरे धीरे चाटते हुए उसकी गांड के छेद में ऊँगली से सहलाना शुरू किया और कभी कभी जीभ से उसकी गांड को भी चाट देता , जब मै उसकी गांड में जीभ लगता तो वो कपने लगता और बड़ी जोर से मेरे लंड को अपने हाथ से काश लेता, मै समझ गया की इसको गांड चटवाने में सबसे ज्यादा मजा आरहा है अब मैंने अपने दाये हाथ में उसका लंड पकड़ा और जीभ उसकी गांड में लगाकर मुह से खूब थूक लगाकर गीला करते हुए गांड के छेद को ढीला करने की कोशिश शुरू की वो मस्ती में था और अपनी रात को दिन बना रहा था , मैंने अब जीभ गांड के अंदर की तरफ घुसानी शुरू की तो वो गांड के छेद को कास लेता था , मैंने धीरे से उसको बोला की गांड को ढीला रखे तब मजा आएगा , उसने वैसा ही क्या और गांड का छेद अब्ब मेरी जीभ को अंदर तक जाने दे रहा था , मैंने अब अपने बाये हाथ की एक उंगली भी उसकी गांड में डालने की कोशिश की और वो मस्ती में अंदर भी चली गई मैंने धीरे धीरे करके दो उंगली अंदर डाली तो उसने मेरे हाथ को पकड़ लिया , मै बोला अब्ब जब पूरी मस्ती का टाइम आया है तो हाथ मत पकड़ो चुप चाप लेते रहो , इतना मजा दूँगा की तुम रोज मुझे बुलाओगे , वो चुप हो गया अब्ब मैंने उसको पलट जाने को कहा वो पलट गया तू मैंने उसके उसके चूतड़ की दोनों फांके खोल कर दोनों हाथो से पकड़ ली और उसकी गांड पे ही चाटने में पूरा जोर लगा दिया. तभी वो बोला बाबूजी मेरा मॉल निकलने वाला है मैंने कहा नहीं अभी रोकने की कोशिश करो, और उसकी गांड चाटना बंद करके मैंने अपने लंड को उसके मुह के पास कर दिया पर वो चुपचाप आँखे बंद किये लेटा रहा मैंने हिम्मत करके उसके होंठ पर अपना लंड लगाया तो उसने आँखे खोली और फिर से मेरा लंड पकड़ कर खाल को ऊपर निचे किया , और एक बार जिब से टोपे को छुआ , और तुरंत ही लंड के टोपे को मुह में ले लिया और च्विंगम की तरह टोपे को चबाने लगा , मै भी आनंद में भर उठा मैंने उसकी गीली गांड में पुनः एक ऊँगली डाल कर चुदाई शुरू कर दी , मैंने अब उससे झूठ बोला की यार तुम तो लंड बड़ा मस्त चूसते हो, पहले कितने लोगो का चूसा है उसने लंड मुह से निकल कर कहा “बाबूजी मै ये सब काम नहीं करता पर आपने इतना गरम कर दिया है की मेरी समझ में नहीं आ रहा है की ये हो क्या रहा है” “पर अच्छा लग रहा है अब जल्दी से मेरा मॉल निकल दो” तो मैंने कहा अच ठीक है, और उसके गांड की तरफ आकर पोजीसन , लेकर बैठ गया और अपने लंड के सुपाडे को उसकी गांड के छेद पे रगड़ने लगा तो उल्टा लेटा हुआ वो मुह घुमाकर बोला “क्या आप मेरी गांड मरोगे बाबूजी” मैंने कहा “नहीं पर अगर तुम कहो तो मै मार सकता हू” वो बोला पर बाबूजी मै भी तुम्हारी गांड मारूंगा अगर मंजूर हो तो ठीक है मैंने कहा ठीक है तुम्हारा लंड इतना मस्त है की तुमसे तो रोज मरवाने का दिल करेगा , और उसके बाद मैंने अपने लंड की टोपी को उसकी गांड के छेद पे दबाया तो गांड इतना खुल चुकी थी की टोपा अंदर हो गया उसने एक शिष्कारी ली और बोला “बाबूजी धीरे धीरे करना पहली बार है, मैंने कभी गांड नहीं चुदाई है, आप पहले आदमी हो” मैंने कहा की “चिंता न करो मै बहुत गांड मार चुका हू ,जरा भी तकलीफ नहीं होगी” और आहिस्ता आहिस्ता उसको बातों में लगाये हुए अपना लंड उसकी गांड में पूरा डाल कर बैठ गया , और उसको घोड़ी की तरह गांड उठाने को कहा जब उसने गांड उठाई तू मैंने निचे से हाथ डालकर उसका उसका लंड पकड़ा और मुठ मारना शुरू किया और हलके हलके झटको से चुदाई शुरू की वो आहे भरता था और सर को चारपाई पे दबाए गांड को हवा में उठाये किसी मस्त चुदक्कड औरत की तरह चुदने लगा , मैंने भी उसके लुंड को और गांड को हलके हलके लगभग १० मिनिट तक चुदाई की और इतनी देर में उसके लंड की नसे फूलने लगी और गांड को वो सिकोड़ने लगा मै समझ गया की इसका जूस निकलने वाला है , मैंने उसके लंड के सुपाडे की तेज मसाज शुरू कर दी और आधे मिनिट में ही उसका गधा जूस मेरे हाथ में आने लगा मैंने मुठी बंद करके टोपे को रगड़ते हुए उसका सारा जूस निकलने के बाद अपने हाथ में लिया और अपने लंड में अचे से लगाकर फिर से पूरा लंड उसकी गांड में डाल दिया और तेज चुदाई चालू कर दी , उसके जूस की वजह से लंड बिलकुल चिकना होकर मुझे बड़ा आनद दे रहा था मैंने लगभग ५ मिनिट की चुदाई की होगी की मेरे लंड का पानी उसकी गांड में निकल पड़ा , और मै धक्के मरते हुए उसके ऊपर ही गिर गया . मै उसकी पीठ पे ५ मिनिट लेटा रहा उसके बाद वो कसमसाया बाबूजी अब उतरो मुझे दर्द हों लगा है मै उसकी पीठ से हटा और अपने पैंट से रुमाल निकल कर अपना लंड साफ किया और उसका लंड भी साफ किया उसके बाद हमदोनो ने कपडे पहने बारिश अभी भी हो रही थी मैंने घडी की तरफ देखा तो सुबह के तिन बज रहे थे’ अब् मुझे घर की यद् आ रही थी ,की बीबी चिंता में होगी मै अभी तक ऑफिस से लौटा नहीं, तब मोबाइल फोन होते नहीं थे , मै ढाबे पे गया और पुचा की उनके पास फोन है क्या तू उन्होंने कहा की एक किलोमीटर आगे पि सी ओ है जो इस समय बंद होगा , मै लौट कर उस पंचर वाले के पास आया , और उससे कहा की मुझे अब जाना होगा क्युकी सुबह फिर ऑफिस जाना है , तो उसने कहा बाबूजी आपने तो अपना काम बना लिया पर आपने वादा किया था की मुझे भी अपनी गांड चुद्वाओगे , मैंने कहा दोस्त मै रोज सुबह शाम यही से निकलता हू जब दिल करे बता देना मै रुक जाऊंगा और तुम गांड छोड लेना पर अभी समझने की कोशिश करो बहुत देर हो गई है. वो समझदार था मन गया और मैंने अपनी मोटर साईकिल उठाई और अपने घर की तरफ चल पड़ा!
शेष भाग अगली बार ....................
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発行者 painlovercock
13年前
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