कन्या भोग
वासना तीर्थ के उस मदन मंदिर में प्रति रात्रि 12 बजे कामदेव की प्रतिमा के सामने योनिभद्रा किशोरी कन्या का शीलहरण पूर्वक कठोर रति मैथुन का नियम था।पंच देवता के प्रतीक के रूप में पांच बलिष्ठ पुरुष एकल काम-कन्या की काया को मरोड़-मरोड़ ,मथ-मथ सम्भोग पर सम्भोग करते थे ,तब तक कि जब तक वह मूर्छित होकर गिर न जाय।इस बार जिसकी बारी थी वो मेरी सहेली की षोडश वर्षीया बालिका थी।कद-काथी में वह 13 वर्ष से ज्यादा नही लगती थी।भोग से पहले उसे मदिरा पिलायी गयी ताकि वह उन्माद में पूर्ण लज्जाहीन हो लिंग प्रवेश सहन कर सके।उस संपूर्ण नग्न किशोरी को सिर्फ सफेद झीनी साड़ी में ढका गया ताकि उसके तन-बदन के उभार दिख सके।पहले उसे लज्जागौरी की अति अश्लील मूर्ति के संमुख माथा नवाया और फिर धीमे-धीमे उसका वस्त्रहरण किया जाने लगा।पूर्ण नग्न होने पर उसे एक काले संगमरमर के बने उत्तेजक शिवलिंग पर इस तरह बैठाया जिससे सब देख सकें कि मोटा शिवलिंग उसकी कमसिन-नाजुक योनि में कम से कम 6 इन्च घुस गया हो। तत्पश्चात उसे एक साथ पांच पुरुषों ने पकड़ ऊपर उठाया।दो ने उसके स्तन,दोने उसकी जंघायें व एकने उसके सिर के बाल पकड़ ऊपर उठाया।फिर एक-एक पुरुष ने उसे भोगा, सभी के लिंग 7 इन्च और 9 इन्च के बीच के थे। एक का 10 इन्च था। अलग-अलग संभोग के बाद सामूहिक संभोग किया गया जो अति अश्लील था।कन्या के अक्षत योनिच्छद को दांतों से काटा गया, खून बहा,खून के तिलक के साथ संभोग किया जाने लगा जिसमें सुकुमारी कन्या मद-आलसा होने के बावजूद तड़फने लगी।यह बताना जरूरी है कि कन्या की योनि में दो लिंग, एक लिंग गुदा ( गांड ) में, और दो लिंग उसके मुख मे धसे-फंसे हुये थे।जब वह सुकुमारी रति-कन्या पूरी बेसुध हो गयी तो देखने वालों ने '' जय हो '' का घोर चीत्कार किया।
10年前