A hindu Nun Ass-fucked during an evening ceremony
मंदिर आरती में चिपक-नितम्ब शिश्नलीला / अर्थात साद्ध्वी एकवस्त्रा सीताबाला की गांड मे लंड
संसार में दुष्टों की कमी नहीं, इनमें कुछ का तो काम ही भोलीभाली और मासूम लड़कियों की इज्जत लूटना है। आज आये दिन दर्दनाक बलात्कार हो रहे हैं,नवविवाहित स्त्रियों को अगवा कर उनके साथ सामुहिक संभोग किया जाता है,कुछ हरामी तो बच्चियों तक को नहीं छोड़ते।एक मामले में तो एक 74 वर्ष के संत ने 14 वर्ष की कन्या से इतना घोर सम्भोग किया कि बच्ची की आंखों से आंसू और योनि से खून निकल पड़ा।
यह घटना बताते हुये मुझे बहुत कड़वा लग रहा है । सीताबाला एक 17 वर्ष की गोरी-चिट्टी,छरहरे बदन की सुकुमार कोमल कन्या है।रामभक्ति की रसिक शाखा 'सखी सम्प्रदाय' में दीक्षा लेने के कारण वह एकवस्त्रा अर्थात सिर्फ और सिर्फ एक अत्यन्त सफेद और झीने कपड़े से अपना तन-बदन ढके रहती है।यह कपड़ा भी इतना कम,छोटा और ओछा होता है कि इससे पूरा शरीर फिर भी नहीं ढक पाता।भीतर ना तो ब्रा होती है और ना ही पेटीकोट या पेंटी।इस पहनावे में उसके स्तन तो प्रायः नग्न दिखते ही हैं,कटि व जंघायें भी हलकी-फुलकी नंगी ही नजर आती हैं।इस धार्मिक सम्प्रदाय में साध्वी का यही वेश सुन्दर,स्वच्छ और पवित्र माना जाता है।सत्संग में सभी साधु पुरुष उसके शील की प्रशंसा करते है ,खास कर महंत रामसुख दास जो उसके नृत्यगुरु भी है।सीताबाला इतनी कमसिन,भोलीभाली,मासूम चेहरावाली कन्या है मगर जब वह गुरु के निर्देशानुसार भगवान राम ,सीतारमण रामजी की मूर्ति के सामने नृत्य करती है तो उसका अंगसंचालन इतना मादक,उत्तेजक और नग्न होता है कि देखने वालों की नस-नस में बिजली दौड़ जाती है।हालांकि यह मधुर नृत्य कुछ खास अवसरों पर ही होता है।वस्तुतः गुप्तांग संचालन एक कला है और इसमें वह निपुण भी है।
सीताबाला नगर के 'रमण-रमणी-राम' मंदिर में नित्यप्रति प्रातः और संध्या आरती में भगवान राम की मधुर-माधुरी मूर्ति के सम्मुख नतमस्तक तन्मय रहती है।
यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना संझा-आरती के समय हुई।जैसे ही आरती का भजन शुरू हुआ सीताबाला ने महसूस किया कि कोई पुरुष उसके नितम्बों से चिपक रहा है । शालीनतावश वह शान्त रही और अपने मधुर कंठ से आरती के भजन का पद गाती रही।वह थोड़ी आगे सरकी तो पीछे लगा पुरुष और ज्यादा उसके नितम्बों से सट गया।पुरुष पेंट पहने था,बदमाशी की नीयत से उसने अब अपने पेंट कि जिप खोल दी, और हे राम - - - उसका नंगा लंड सीताबाला के नितंबों से टकराने लगा, कभी -बाला की दायीं चूतड़ पर तो कभी बा्यीं पर।उधर भजन चल रहा था, ''जय श्री राम हरे,भक्तजनों के संकट तत्क्षण दूर करे * * * '' और इधर एक पुरुष-लंड , मोटा और कड़ा -बाला की कड़क गांड में चुभने लगा।साध्वी ने थोड़ा कसक-मसक किया पर वह भक्ति में लीन थी, गा रही थी, ''जो ध्यावे सुख पावे कष्ट मिटे तन का, मधुराभक्ति बढावे अंग-अंग फड़का''; भक्ति की महिमा समझ पुरुष ने साध्वी की सफेद साड़ी ऊंची सरका दी और नि्डर हो -बालासीता की गांड के छेद में लंड ठोंक दिया।जैसेजैसे आरती आगे बढती पुरुष का लंड और आगे उसकी गांड में धंसता जा रहा था, ''राम-रमण सीता रमणी की जो आरति गावे, जो मनमोह लगावे तो पाप पलट-जावे''।यानी पूरी आरती के दौरान साध्वी की कड़क गांड वो मारता रहा।आरती खत्म होते-होते तो पुरुष का एक हाथ -बालाछोरी की नाजुक चूत पर भी सरक गया और दे एक अंगुल चूत के छेद में।दुर्भाग्य से इसी समय बिजली चली गयी और अंधेरे का फायदा उठा पुरुष ने सुन्दरी सुमुखी सीताबाला की जमकर गांड मारी।
संसार में दुष्टों की कमी नहीं, इनमें कुछ का तो काम ही भोलीभाली और मासूम लड़कियों की इज्जत लूटना है। आज आये दिन दर्दनाक बलात्कार हो रहे हैं,नवविवाहित स्त्रियों को अगवा कर उनके साथ सामुहिक संभोग किया जाता है,कुछ हरामी तो बच्चियों तक को नहीं छोड़ते।एक मामले में तो एक 74 वर्ष के संत ने 14 वर्ष की कन्या से इतना घोर सम्भोग किया कि बच्ची की आंखों से आंसू और योनि से खून निकल पड़ा।
यह घटना बताते हुये मुझे बहुत कड़वा लग रहा है । सीताबाला एक 17 वर्ष की गोरी-चिट्टी,छरहरे बदन की सुकुमार कोमल कन्या है।रामभक्ति की रसिक शाखा 'सखी सम्प्रदाय' में दीक्षा लेने के कारण वह एकवस्त्रा अर्थात सिर्फ और सिर्फ एक अत्यन्त सफेद और झीने कपड़े से अपना तन-बदन ढके रहती है।यह कपड़ा भी इतना कम,छोटा और ओछा होता है कि इससे पूरा शरीर फिर भी नहीं ढक पाता।भीतर ना तो ब्रा होती है और ना ही पेटीकोट या पेंटी।इस पहनावे में उसके स्तन तो प्रायः नग्न दिखते ही हैं,कटि व जंघायें भी हलकी-फुलकी नंगी ही नजर आती हैं।इस धार्मिक सम्प्रदाय में साध्वी का यही वेश सुन्दर,स्वच्छ और पवित्र माना जाता है।सत्संग में सभी साधु पुरुष उसके शील की प्रशंसा करते है ,खास कर महंत रामसुख दास जो उसके नृत्यगुरु भी है।सीताबाला इतनी कमसिन,भोलीभाली,मासूम चेहरावाली कन्या है मगर जब वह गुरु के निर्देशानुसार भगवान राम ,सीतारमण रामजी की मूर्ति के सामने नृत्य करती है तो उसका अंगसंचालन इतना मादक,उत्तेजक और नग्न होता है कि देखने वालों की नस-नस में बिजली दौड़ जाती है।हालांकि यह मधुर नृत्य कुछ खास अवसरों पर ही होता है।वस्तुतः गुप्तांग संचालन एक कला है और इसमें वह निपुण भी है।
सीताबाला नगर के 'रमण-रमणी-राम' मंदिर में नित्यप्रति प्रातः और संध्या आरती में भगवान राम की मधुर-माधुरी मूर्ति के सम्मुख नतमस्तक तन्मय रहती है।
यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना संझा-आरती के समय हुई।जैसे ही आरती का भजन शुरू हुआ सीताबाला ने महसूस किया कि कोई पुरुष उसके नितम्बों से चिपक रहा है । शालीनतावश वह शान्त रही और अपने मधुर कंठ से आरती के भजन का पद गाती रही।वह थोड़ी आगे सरकी तो पीछे लगा पुरुष और ज्यादा उसके नितम्बों से सट गया।पुरुष पेंट पहने था,बदमाशी की नीयत से उसने अब अपने पेंट कि जिप खोल दी, और हे राम - - - उसका नंगा लंड सीताबाला के नितंबों से टकराने लगा, कभी -बाला की दायीं चूतड़ पर तो कभी बा्यीं पर।उधर भजन चल रहा था, ''जय श्री राम हरे,भक्तजनों के संकट तत्क्षण दूर करे * * * '' और इधर एक पुरुष-लंड , मोटा और कड़ा -बाला की कड़क गांड में चुभने लगा।साध्वी ने थोड़ा कसक-मसक किया पर वह भक्ति में लीन थी, गा रही थी, ''जो ध्यावे सुख पावे कष्ट मिटे तन का, मधुराभक्ति बढावे अंग-अंग फड़का''; भक्ति की महिमा समझ पुरुष ने साध्वी की सफेद साड़ी ऊंची सरका दी और नि्डर हो -बालासीता की गांड के छेद में लंड ठोंक दिया।जैसेजैसे आरती आगे बढती पुरुष का लंड और आगे उसकी गांड में धंसता जा रहा था, ''राम-रमण सीता रमणी की जो आरति गावे, जो मनमोह लगावे तो पाप पलट-जावे''।यानी पूरी आरती के दौरान साध्वी की कड़क गांड वो मारता रहा।आरती खत्म होते-होते तो पुरुष का एक हाथ -बालाछोरी की नाजुक चूत पर भी सरक गया और दे एक अंगुल चूत के छेद में।दुर्भाग्य से इसी समय बिजली चली गयी और अंधेरे का फायदा उठा पुरुष ने सुन्दरी सुमुखी सीताबाला की जमकर गांड मारी।
10年前