बॉस की चूत में लौड़े का कमाल

मैं 27 साल का हूँ.. मैं अभी नॉएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ। मेरी हाइट 5’8” है.. लण्ड का साइज़ पूरा 8 इंच लम्बा और साढ़े तीन इंच गोलाई में मोटा है.. नापा हुआ है।

यह स्टोरी मेरे ऑफिस में मेरी और प्रोजेक्ट मैनेजर की है। मुझे नहीं लगता कि उसके बारे में बताने के लिए मेरे पास कोई शब्द भी है.. वो इतनी सुंदर है कि क्या कहूँ। वो मैरिड है.. उम्र 36 साल है.. लेकिन लगती है 26-27 की.. मस्त फिगर.. उफ्फ्फ.. क्या कहूँ.. उसकी 36-30-38 की फिगर देखकर किसी का भी खड़ा होकर कड़ा हो जाए।

उसके मम्मों को देख कर तो ऐसा लगता है.. कि सब कुछ फाड़ कर बाहर निकल आएंगे… उसकी उठी हुई गाण्ड.. उफ्फ माय गॉड..
वो ऑफिस में फॉर्मल ड्रेस में आती है.. कभी-कभी साड़ी में आती है.. लेकिन जब शनिवार को जीन्स और टॉप में आती है.. तो उस दिन तो सारे मर्द अपना लण्ड हिला-हिला कर थक जाते हैं।

तो हुआ यूँ कि सबकी तरह मैं भी उसे बहुत देखता था.. पर मैं कुछ ज्यादा ही उसे देखता था और उसे देखते ही मेरा लण्ड खड़ा हो जाता था। वो ये चीज़ नोटिस कर चुकी थी.. ऐसा कई बार हो चुका था। एक बार तो लिफ्ट में मैं उसके पीछे खड़ा था.. तो और मेरा लण्ड टाइट हो गया और उसकी गाण्ड में घुसा जा रहा था.. वो भी समुझ गई थी।

वो और मैं अब धीरे-धीरे क्लोज होते जा रहे थे.. लेकिन हमारे बीच कुछ भी ऐसा नहीं था.. जिससे लगे कि हम दोनों सेक्स तक पहुँच जाएंगे।
मेरे अन्दर तो आग थी ही उसे चोदने की.. लेकिन मुझे ये नहीं मालूम था कि वो भी मुझसे चुदना चाहती है।

अब आया मूल्यांकन का टाइम.. मेरे काम का रेकॉर्ड अच्छा था.. लेकिन मुझे कुछ अधिक तरक्की चाहिए थी.. जो मुझे नहीं लगता था कि मुझे मिलेगी.. मैं वंदना के पास गया और उनसे बढ़ाने के लिए बोला.. लेकिन उसने मना कर दिया।
मैंने बहुत रिक्वेस्ट की.. तब उसने बोला- अच्छा देखते हैं।

लेकिन दो दिन हो गए.. कोई जवाब नहीं मिला… मैं उसके पास फिर गया और रिक्वेस्ट की..
इस बार वो बोली- मुझसे लंच में मिलना।
मैंने कहा- ठीक है।

मैं लंच में मिलने गया.. उस दिन शनिवार था.. सो वो जीन्स-टॉप में आई थी। मेरी नज़र उसके मम्मों से हट ही नहीं रही थी.. जो वो लगातार नोटिस कर रही थी।

उसने कहा- देखो तुम मेरे बहुत अच्छे फ्रेंड हो.. लेकिन अगर मैंने ऐसे ही तुम्हें इतना सारा इन्क्रीमेंट दिलवा दिया.. तो ऑफिस में इस बात को लेकर कोई इशू हो सकता है.. कोई भी पूछ सकता है।

मैंने कहा- अरे वंदना जी.. इस बार देख लो न प्लीज़.. अगली बार इतना नहीं कहूँगा।
वो बोली- क्या देख लूँ..
और यह कहकर हँस पड़ी।

लेकिन मैं कुछ समझा नहीं मैंने सोचा भी नहीं था।
मैंने कहा- अरे इस बार देख लो न प्लीज..
वो बोली- मैं तो कब से वेट कर रही हूँ.. दिखाओ न.. तुमने तो बहुत देख लिया.. अब मुझे भी कुछ दिखाओगे?

अब मुझे लगा कि कुछ मामला कहीं और जा रहा है।
मैंने कहा- मैंने क्या देखता हूँ.. कुछ भी तो नहीं..
वो बोली- मुझे सब मालूम है.. झूठ मत बोलो.. अब हर टाइम तुम्हारी नज़र कहाँ रहती है.. और दिमाग कहाँ रहता है। अच्छा.. तुम्हें क्या अच्छा लगता है मुझ में?

मैंने कहा- आप में तो सब कुछ ऐसा है जिससे नज़र हटती ही नहीं है।
वो बोली- सबसे अच्छा क्या लगता है?
मैंने कहा- सच बोलूँ?
वो बोली- हाँ.. खुलकर बोलना.. शर्माना और डरना नहीं।

तब मैंने उसके मम्मों की तरफ देखा.. जो उसके वाइट टॉप को फाड़ते हुए बाहर निकल रहे थे और कहा- आपके ये मम्मे उफ़.. माय गॉड.. इतने बड़े तो मैंने आज तक नहीं देखे.. इसे देखते ही मेरा टाइट हो जाता है।
वो हँस पड़ी.. बोली- खिलाड़ी हो या अनाड़ी?

मैंने बोला- एक बार मौका दो.. खुद ही पता चल जाएगा।
बोली- चलो ठीक है.. थर्सडे को मैं ऑफ ले रही हूँ.. उस दिन तुम्हें मौका देती हूँ। अगर तुम खिलाड़ी निकले.. तो तुम्हारा इन्क्रीमेंट उतना हो जाएगा.. जितना तुम चाहते हो.. लेकिन अगर अनाड़ी निकले तो मैं तुम्हारा इन्क्रीमेंट उससे भी कम करा दूँगी.. जितना तुम्हें मिलना था।
मैंने कहा- ऐसी बात है.. तो मुझे मंजूर है।

मैं खुश हो गया.. क्यूंकि मुझे अपने लण्ड पर पूरा भरोसा था।

अब थर्सडे आया.. तो मैं उसके घर पहुँचा।
वो लाल रंग की साड़ी में थी.. बला की खूबसूरत लग रही थी।
मैंने कहा- वंदना जी.. आज तो आप बहुत हॉट और सेक्सी लग रही हैं।
वो बोली- गौरव मुझे ‘आप’ और ‘जी’ मत बोलो.. सिर्फ ‘वंदना’ और ‘तुम’ कहो।
मैंने कहा- ठीक है।

उसने ब्लाउज ऐसा पहन रखा था.. जिससे उसके थोड़े-थोड़े मम्मे साफ़ दिख रहे थे। यह देखकर मेरा लण्ड खड़ा हुआ जा रहा था.. ये उसने देख लिया था।
वो बोली- लगता है ‘कोई बहुत प्यासा है..’
मैंने लौड़े पर हाथ फेरते हुए कहा- हाँ..

वो कटीली अदा से मुस्कुराई.. मैंने उसको अपनी ओर खींच लिया और उसके होंठों पर किस करने लगा।

क्या कहूँ फ्रेंड्स.. क्या रसीले होंठ थे उसके दस मिनट तक हम किस करते रहे.. फिर मैंने उसकी गर्दन पर, नाभि पर हर जगह किस किया।
वो अब तक पूरी गर्म हो चुकी थी.. मैंने उसको घुमा दिया और पीछे से कमर से पकड़ लिया, उसकी मोटी गाण्ड दबाने लगा।
मैंने कहा- वाह जान.. क्या गाण्ड है।
वो बोली- सब कुछ यहीं करोगे या बेडरूम में भी चलोगे।

हम दोनों बेडरूम की ओर चल दिए। मैंने उसको बिस्तर पर लेटा दिया। अब उसकी साड़ी का पल्लू हटा दिया और मम्मों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा।
उसने मेरी टी-शर्ट उतार दी, मैंने भी उसकी साड़ी उतार दी और उसकी नाभि में चुम्बन करने लगा।

मैंने उसके होंठों पर.. पेट पर.. गर्दन पर.. खूब किस किया.. वो बहुत गर्म होती जा रही थी।
फिर मैंने उसका ब्लाउज भी उतार कर फेंक दिया।

ओह माय गॉड.. क्या कहूँ फ्रेंड्स.. इतने बड़े मम्मे को मचलते देखकर ही लण्ड पूरा तन्ना गया।
मैं बोला- वंदना.. उफ्फ.. क्या मम्मे हैं।
वो गर्व से खुश हो रही थी और मैं उसके मम्मों को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा।

उसने लाल रंग की ही ब्रा पहनी हुई थी.. कसम से क्या लग रही थी।
मैंने जोर-जोर से उसके मम्मों को हाथों से.. मुँह से दबाने लगा।

अब वो भी गरम हो उठी थी और ‘आआआह्ह्ह्ह..’ कर रही थी, उसे बहुत मजा आ रहा था।
मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसकी ब्रा उतार कर फेंक दी।

आह्ह.. क्या मोटे और बड़े मम्मे बाहर निकल कर आए.. देखकर मजा आ गया।
मैंने जी भर कर उन्हें चूसा.. दबाया.. निप्पल काटे.. चूसे.. इधर मेरे लण्ड का बहुत बुरा हाल था.. जो उसने देख लिया था।

वो बोली- ज़रा अपने हथियार के भी तो दीदार कराओ.. ऊपर से तो बहुत मस्त लग रहा है।
मैंने कहा- तो निकाल लो न.. कब से बाहर आने को तड़प रहा है।
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उसने मेरी जीन्स और फ्रेंची उतार कर फेंक दी और तुरंत मेरा फनफनाता हुआ पूरा टाइट लण्ड उसके मुँह के सामने झूलने लगा।
उसे देखते ही उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं.. वो बोली- ओह माय गॉड वाओ.. कितना लम्बा मोटा खीरे जैसा है.. मैंने तो सोचा भी नहीं था कि तुम्हारा ऐसा होगा.. मैं तो अब तक अपने पति का ही सबसे अच्छा समझती थी.. लेकिन तुम्हारा तो क्या मस्त तगड़ा लण्ड है..

मैंने कहा- इसी हथियार से ऐसा वार करूँगा कि तुम कहोगी वह क्या हमला किया है।
बोली- तो जल्दी करो न.. अब रहा नहीं जा रहा है।

वो मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी। कोई 15 मिनट तक चूसने के बाद बोली- तुम्हारा तो माल निकल ही नहीं रहा है।
मैंने कहा- अभी मेरे हथियार के जलवे देखे ही कहाँ हैं मैडम..
बोली- तो जल्दी दिखाओ न.. कब से तड़प रही हूँ।

मैंने उसका पेटीकोट उतार कर फेंक दिया और जाँघों को चूमता हुआ उसकी चूत तक पहुँच गया।
हाथ फेरा तो पता चला.. कि वो तो पूरी गीली है।
मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डाल दी।

वो ‘आआ आआआ आआह्ह्ह..’ करने लगी।
मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में पूरी अन्दर तक घुसा दी।
‘आह्ह.. उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ गौरव.. प्लीज.. अब डाल भी दो।’

मैंने अपनी दो उंगलियाँ चूत में घुसा दीं और अन्दर-बाहर करने लगा। वो एकदम से मच उठी.. चूत उठा कर सीसी करने लगी, बोली- गौरव.. साले अब जान लोगे क्या प्लीज.. वार करो न प्लीज..
मैंने उसकी दोनों टाँगे उठाईं और अपने कंधों पर रख लीं और अपना लण्ड उसके चूत के मुँह पर रखकर ज़ोरदार झटका लगाकर एक बार में ही पूरा का पूरा लौड़ा चूत में उतार दिया।

वो चिल्ला पड़ी- आह्ह.. गौरव.. आराम से..
फिर मैंने दबा कर धक्के मारने चालू किए और वो चिल्लाए जा रही थी आह्ह.. ओह्ह.. धीरे बेबी..
अब उसे भी मजा आने लगा ‘यस.. कम ऑन.. गौरव.. फ़क मी हार्ड यस फ़क मी फ़ास्ट.. फ़ास्ट.. कम ऑन.. गिव मी मोर..’

और मैं धक्के पे धक्के दिए जा रहा था।
कुछ ही देर में मैंने उसका घोड़ी बनने को बोला और वो तुरंत रेडी हो गई।
क्या मस्त मोटी गाण्ड थी उसकी.. मैंने 3-4 झापड़ लगाए और लगा चोदने।
उसे 20 मिनट तक हचक कर चोदा.. हमारी चुदाई दम से चली।

फिर मैंने पूछा- अब बताओ मैं खिलाड़ी हूँ या अनाड़ी?
बोली- अरे तुम तो चैंपियन निकले जान..
हम दोनों हँस पड़े।
फिर मैंने उसको उस दिन 3 बार चोदा।
発行者 Kaamdev007
9年前
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