FRIENDS sister REKAH (HINDI) 2

दोस्तो क्षमा करना
मै कुछ समय से आपसे नही मिल पाया…………
खैर कहानी आगे बढाता हूँ ----
बात उन दिनों की है जब मै स्कूल में पढता था! मेरे साथ मेरा मित्र सुधीर भी था! हम दोनों एग्जाम्स के दिनों में एकसाथ रात-रात भर एक दुसरे के घर पर पढाई किया करते थे! कभी वो मेरे घर पर आता था कभी मै उसके घर चला जाता था! सुधीर की एक बड़ी बहन रेखा थी! वो कॉलेज में पढ़ती थी! वो हम दोनों को मुश्किल सवालों का हल बताया करती थी! हम अक्सर अपनी प्रोब्लम उनसे ही हल करवाते थे!
सुधीर के मामा की शादी थी! वो अपने पापा-मम्मी के साथ ननिहाल चला गया! रेखा दीदी को कोलाज का कोई प्रोजेक्ट पूरा करना था सो वो रुक गयी,शादी में बाद में जाने के लिए! मुझे मेथ्स के कुछ सवाल समझ नहीं आ रहे थे, मेने सोचा क्यु नही रेखा दीदी से ही पूंछ लूँ ..?
उस दिन सन्डे था! मै सुबह करीब १० बजे उनके घर पहुच गया! मेने उनके घर की बेल बजाई, तो दरवाजा नहीं खुला! कई बार बेल बजाने पर दीदी ने दरवाजा खोला! बोली मै नहा रही थी! उन्होंने टॉवेल के कपडे का बना हुआ पिंक कलर का गावुन पहन रखा था! गावुन में वो पूरी तरह ढकी हुई थी!
दीदी बोली-- क्या हुआ ..?
मेने कहा-- दीदी कुछ सवाल समझ नहीं आ रहे है, आप समझा दोगे ..?
दीदी-- पर अभी..?
मैं-- प्लीज़
दीदी-- पर...अभी मै अपना प्रोजेक्ट का काम करुँगी, कल समिट करना है!
मै-- प्लीज़,थोड़े से ही हैं! आप जल्दी समझा दोगे!
दीदी-- ठीक है आजाओ
मै दीदी के साथ अन्दर आ गया! वो मुझे अपने बेडरूम में ही ले गयी, बोली चलो वँही पढ़ा दूंगी! मै उनके बेड पर बैठ गया और वो स्टूल ले कर मेरे पास बैठ गयीं! तब मै १५ साल का था पर सेक्स के बारे में कुछ भी नहीं जानता था! वो मुझे सवाल समझाने लगी! सवाल समझाते वक्त वो आगे झुकी तो उनके स्तन आगे निकल कर आ गए! तब मेने पहली बार किसी लड़की के स्तन इतनी नजदीक से देखे! मै कुछ समझा नहीं,पर देखने में अच्छे लग रहे थे! दीदी का गावुन आगे से खुला था जिसे उन्होंने लपेट रखा था! दीदी ने अपनी टांगे एक के उपर एक करी तो वो गावुन से बाहर निकल आई, एक दम मलाई की तरह गोरी, टांगे देख कर पलही बार मुझे कुछ अजीब सा लगा, कुछ अच्छा, सरीर में एक ठंडी हवा सी दोड़ गयीं!
मेरा मन अब पढाई में नहीं लग रहा था, दीदी के बदन को देखना अच्छा लग रहा था! मेरे लिंग में भी कुछ कुछ होने लगा था! पर दीदी इस बात से बे-खबर मुझे सवाल समझाने में लगी थी! एका-एक दीदी का ध्यान मेरी ओर गया
दीदी-- क्या कर रहे हो..? क्या पढाई में दिमाग नहीं लग रहा..? मेने अभी तुमसे कुछ पूंछा..?
वास्तविकता यह थी कि दीदी के गोरे बदन को देखने में मै इतना खो गया कि पता ही नहीं रहा कि दीदी मुझसे कुछ पूंछ रही है!
मै (चोंक कर बोला)-- न … नहीं
दीदी-- क्या नहीं..? कुछ नहीं खाना..? मै तो अभी नहा कर आई हूँ, मुझे भूंक लग रही है!
मै-- हाँ, भूंक तो मुझे भी लग रही है!
दीदी-- तुम बैठो, मै अभी कुछ लाती हूँ!
दीदी रसोई में कुछ लेने चली गयीं, मेरा अब किसी काम मै मन नहीं लग रहा था, बस दीदी के मलाई से गोरे बदन को पूरा देखने कि इच्छा होने लगी! यह सोच कर मै भी उनके पीछे-पीछे चल दिया और रसोई के गेट पर खड़ा हो गया!
दीदी-- कुछ चाहिए ..?
मै-- हाँ, पानी पीना है.
दीदी-- तो ले लो उस फ्रिज से!
मै फ्रिज से बोतल निकल कर पानी पीने लगा, पर मेरा ध्यान दीदी के ऊपर ही था! दीदी ने जेसे ही ऊपर की दराज़ से कुछ सामान निकला, हाथ ऊपर करने से उनका गावुन आगे से खुल गया, मेने देखा वो पूरी नंगी थी, केवल एक ब्लैक कलर की पेंटी पहन राखी थी! दीदी के पूरे गोरे बदन को देखते ही मेरे पूरे बदन में सिहरन सी दोड़ गयीं! मेने पहली बार यह नज़ारा देखा था, लगा अभी इस चाँद को पकड़कर अपनी बांहों में भर लूँ
मै फ्रिज से बोतल निकल कर पानी पीने लगा, पर मेरा ध्यान दीदी के ऊपर ही था! दीदी ने जेसे ही ऊपर की दराज़ से कुछ सामान निकला, हाथ ऊपर करने से उनका गावुन आगे से खुल गया, मेने देखा वो पूरी नंगी थी, केवल एक ब्लैक कलर की पेंटी पहन राखी थी! दीदी के पूरे गोरे बदन को देखते ही मेरे पूरे बदन में सिहरन सी दोड़ गयीं! मेने पहली बार यह नज़ारा देखा था, लगा अभी इस चाँद को पकड़कर अपनी बांहों में भर लूँ!
दीदी के गोरे गोरे और मोटे मोटे बोबे मुझे साफ-साफ दिख रहे थे। मै बोतल से पानी पीत हुआ दीदी की तरफ़ बढ्ने लगा।मैने जान कर अपने हाथ से पनी की बोतल गिरा दी और खुद भी फ़िसल कर गिर गया। मुझे गिरता देख दीदी मुझे उठाने झुकी तो उनके बोबे मेरे सामने लटक गये। दीदी के बोबे एक दम दुध से सफ़ेद और उन पर काली बडी इलायची सा दाना भी था। मै बहुत खुश हुआ। दीदी ने न अपने शरीर का और न मेरी नज़रो पर ध्यान दिया,बस मुझे उठाने लगी। कोमल और मुलायम बोबे मेरे हातो से टकरा रहे थे, मानो मुझे जन्न्त का एहसास करा रहे हों।
मैने कहा-- दीदी आप तो बहुत सुन्दर हो
दीदी-- मुझे पता है
दीदी-- जब मै घर पर अकेली होती हूँ इसी तरह रहती हूँ।
मै-- पर आज तो मै भी हूँ ?
दीदी-- कोई बात नही,तुम मुझसे छोटे हो।
मै-- दीदी … … मुझे कुछ कुछ हो रहा है ?
दीदी-- क्या हो रहा है, मुझे बताओ ?
मै-- दीदी, मुझे यहाँ कुछ कुछ हो रहा है (मैने अपने लण्ड की तरफ़ इशारा किया)
मै उस वक्त सैक्स के बारे मे कुछ भी नही जानता था,सो मुझे पाता ही नही चला मेरे शरीर मे क्या हो रहा है।
दीदी उस दिन शायद मुझसे छेड्खानी करने के मूड मे थी सो …
बोली-- मुझे दिखाओ … … क्या हुआ है यहाँ ?
और वो मरी निक्कर उतारने लगी(उस वक्त मै निक्कर पहनता था)निक्कर के अन्दर मैने कुछ नही पहना था सो मेरा लण्ड खुल कर सामने आ गया। वो इस वक्त खडा था, मुझे पता नही क्यूँ, लग रहा था … अन्दर कुछ चल रहा है, मानो घोडे दोड रहे हों।
दीदी बोली-- क्या बात है…? इतना बडा…?
मै-- (कुछ समझा नही) क्या हुआ …? कुछ गड्बड है ?
दीदी-- अभी बताती हूँ ,पहले अपने सारे कपडे उतारो
फ़िर दीदी ने अपने ही हाथ से मेरे सारे कपडे उतार कर मुझे पूरा नंगा कर दिया। पहली बार किसी लड्की के सामने मै नंगा हुआ था। दीदी मेरे पूरे बदन को हाथ से सहला कर देख रही थी। दीदी ने मेरे मुह से अपना हाथ सहलाना शुरू किया, गर्दन से होते हुए मेरे सीने पर, फ़िर नीचे पेट से होते हुये मेरे लण्ड को पकड लिया। मेरे पूरे शरीर मे करन्ट सा दोड गया, दीदी मेरे लण्ड को हाथ से ऊपर-नीचे सहला रही थी, मेरे लण्ड मे बहुत ज्यादा तनाव आ गया था, एक नया एहसास था, बहुत अच्छा लग रहा था, मै एकदम गरम सा हो रहा था, मन कर रहा था दीदी को कस कर अपनी बाहो मै जकड लूँ। अचानक दीदी अपना मुह मेरे लण्ड से टक्रराने लगी, दीदी की साँसो की गरम हवा मेरे लण्ड को और उत्तेजित करने लगी।
मै बोला-- दीदी क्या कर रही हो ? मुझसे खडा नही हुआ जा रहा।
दीदी-- चलो अन्दर कम्ररे मे चलते है।
हम वापस बेडरूम मे आ गये। मुझे अन्दर डर भी लग रहा था और खुशी भी, पता नही आगे क्या होगा ? मन मे अच्छा लग रहा था, तो सोचा अच्छा ही होगा। दीदी ने मुझे बैड पर बिठा दिया और वो नीचे मेरे पैरो के पास बेठ कर मेरे लण्ड के साथ खेलने लगी, फ़िर अपने मुह मे लेकर उसे चूसने लगी। पेहला एहसास था, मेरे लण्ड मे घोडे से दोड रहे थे
मै-- आह … सी … आह … दीदी बहुत अच्छा लग रहा है
दीदी-- अभी और भी अच्छा लगेगा, जरा अपने हाथ से मेरे बोबे पकडो …
मै दीदी के बोबे पकड कर दबाने लगा उत्तेज्ना मै मैने जोर से बोबे दबा दिये
दीदी-- अरे इतना जोर से नही, प्यार से सेहलाओ …
मै दीदी के बोबे प्यार से सेहलाने लगा, दीदी मेरे लण्ड पर थूक लगा कर प्यार से चाट रही थी। कभी मेरे लण्ड को पूरा अपने मुह मे ले लेती तो कभी अपनी जीभ से लोलीपोप की तरह चूसती। मै बदमस्त होता जा रहा था, अन्दर पूरे शरीर मै घोडे दोडने लगे, पूरा बदन गर्म सा हो गया था, दीदी मेरे लण्ड को अपने मुह मे लिये अलग-अलग तरह से चूस रही थी, अचानक मुझे लगा मेरे अन्दर से कुछ बाहर निकलना चाहता है, बहुत जोर का एक मीठा सा दर्द होने लगा, दर्द भी हो रहा था पर बहुत आच्छा भी लग रहा था, मुझे लगा जो चीज निकलना चाहती है उसे जल्दी से निकाल दू …
दीदी मेरे लण्ड को मुह मे ले कर जोर-जोर से चूस रही थी …
आह … सी … आह … सी …आआआआ ह्ह्ह्हह्ह … और मेरे लण्ड मे से कुच तरल निकल कर दीदी के मुह मे चला गया। मुझे मानो जन्न्त का मजा आ रहा हो। मेरी आँखे बन्द सी हो गयी, मै उस दर्द के आनन्द मै खो सा गया। मै बैड पर बैठा था, कब लेत गया पता ही नही चला। जब मेरी आँख खुली तो देखा दीदी सामने खडी मुस्कुरा रही थी।
दीदी-- केसा लगा ?
मै-- ये क्या था ?
दीदी-- अच्छा लगा क्या ?
मै-- बहुत अच्चा
दीदी मेरे पास आ कर लेट गयी,बोली और करोगे ? मै भला ना क्यू करता, मेरी तो लोटरी निकल गयी थी। दीदी बोली अच्छा अब दूसरी तरह से करेंगे। मै तो सेक्स के समन्दर का नोसिखिया तैराक था, दीदी बताती गयी और मै सेक्स के समन्दर की गहरायियो मे उतरता चला गया।

दोस्तों यंहा से मेरे योवनी जीवन की शुरूवात हुई। रेखा दीदी मेरी सेक्स गुरू बनी। उन्होने मुझे बहुत कुछ दिया और सिखाया भी …
अगली कहनी मे मै उनसे मिलन की आगे की बात बताऊँगा …………………
発行者 nanukumar
14年前
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