FRIENDS sister REKHA (HINDI) 3
पिछ्ली कहानी……
दीदी मेरे पास आ कर लेट गयी,बोली और करोगे ? मै भला ना क्यू करता, मेरी तो लोटरी निकल गयी थी। दीदी बोली अच्छा अब दूसरी तरह से करेंगे। मै तो सेक्स के समन्दर का नोसिखिया तैराक था, दीदी बताती गयी और मै सेक्स के समन्दर की गहरायियो मे उतरता चला गया।
अब आगे……
मै बिस्तर पर बिलकुल नंगा लेटा था,रेखा दीदी भी मेरे पास आ कर लेट गयी। मै 16 साल का नादान बालक था,उस समय मै सेक्स के बारे मे कुछ भी नहीं जानता था। मुझे लड्के और लड्की के बीच का अन्तर भी नही पता था। हम पोद्दार स्कूल मे पढ्ते थे,जो सिर्फ़ लड्को का ही था,पढाकू बच्चे थे,कडकियो की तरफ़ कभी ध्यान ही नही गया। खैर……
दीदी मेरे पास लेटी थी,मुझे अजीब सा लग रहा था पर अच्छा भी लग रहा था। दीदी एकदम गोरे बदन की थी,शरीर चिकना और चमकदार,बहुत सुन्दर्। दीदी ने मेरे लण्ड की तरफ़ इशारा करके पूंछा…
दीदी -- ये क्या है ?
मै -- छ्न्नू (उस वक्त वो सो रहा था)
फ़िर दीदी अपना हाथ उसपर सहलाने लगी,अचानक वो बढने लगा। मै हैरान था,ऐसा पहले कभी नहीं हुआ,मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। छ्न्नू एकदम तन कर लट्ठ बन गयी थी।
दीदी -- अब बताओ ये क्या हे ?
मै -- छ्न्नू ही तो है
दीदी -- नही … इसे लोन्डा कहते है मतलब लण्ड, ये लड्को की पह्चान हे। अब मेरे वहां हाथ लगा कर देखो क्या हे ?
मैने हाथ लगाया तो दीदी मचल उठी, दीदी नीचे से एक दम गोरी,चिकनी,और मुलायम थी। वहां भूरे भूरे मुलायम बाल भी थे
मै -- दीदी… यहां तो एक लखीर हे,
दीदी -- ये लडकियों की पहचान हे, इसे योनी कहते है मतलब चूत या बुर। ये लडकों की जरुरत होती हे।
दीदी -- अच्छा बताओ तुम्हारे पापा ने तुम्हारी मम्मी से ही शादी क्यू की ?
मै -- पता नहीं
दीदी -- मै बताती हूँ …तुम मेरे ऊपर तो आओ …
मै दीदी के ऊपर उकडू बैठ गया, दीदी ने मुझे थोडा नीचे खिसकाया, फ़िर एक हाथ से मेरा लण्ड पकडा और दूसरे हाथ से अपनी चूत का द्वार खोलकर उस पर लण्ड को सटा दिया।
दीदी -- अब थोदा ऊपर की ओर धक्का मारो
मैने जैसे ही धक्का लगाया, दीदी के मुख से चीख सी निकल गयी, मुझे लगा ……… जैसे … मेरा लण्ड आग की भट्टी मे घुस गया हो … मुझे बहुत ही अच्छा लगा … मेरा लण्ड रेखा दीदी की चूत की गहराइयो मे समा चुका था।
मेरा मुह दीदी के बोबों के ऊपर था, बोबे दूध की तरह एकदम गोरे …… मलाई की तरह चिकने और गुब्बारे की तरह फ़ूले हुए थे, उसपर बडी इलायची सा काला दाना बहुत ही सुन्दर लग रहा था।
मै -- ये क्या हे ?
दीदी -- इसे चूचियां कहते है … इन्हे मुह से चूसा जाता हे
मै -- मै इन्हें चूसूँ ?
दीदी -- हाँ … मगर प्यार से
मेरा लण्ड रेखा दीदी की चूत मै ही घुसा था,मै दीदी के बोबो को मुह मे लेकर चूसने लगा, दीदी तो जेसे मस्त होती जा रही थी,दीदी के मुह से आवाजें आने लगी …
आह … आह … आह … थोडा जोर से चूसो … आह … उई … आह … आह
बोबे एकदम गोलमटोल बौल की तरह थे, मै अपने हाथों से दोनों बोबों को पकड कर बारी-बारी चूस रहा था, दीदी मुझे पीठ पर से सहलाने लगी,अपने चूतर भी हिलाने लगी
बोली …… नीचे लण्ड को भी हिलाओ … उसे ऊपर नीचे हिलाओ … आह … आह … बोबे भी चूसते रहो … आह … आह … मजा आ रहा है … आह … आह … और चूसो … जोर से चूसो … आह … आह
मै अपने लण्ड को ऊपर-नीचे हिलाने लगा,मेरा लण्ड लकडी की तरह कडक हो गया था,चूत की अन्दर की दीवारो पर जा कर टकरा रहा था,बहुत आनन्द आ रहा था। दीदी भी अपने चूतडो को हिला हिला कर पूरा साथ दे रही थी। एकाएक दीदी ने मुझे घुमा दिया,अब मै बिस्तर पर लेटा था और दीदी मेरे ऊपर,मेरा लण्ड अब भी दीदी की
चूत के अन्दर ही था। दीदी के बोबे मेरे ऊपर लटकने लगे, जेसे दो पके आम लटके हों,बहुत ही अच्छे लग रहे थे,मेने उन्हें हाथों से पकड लिया और सहलाने लगा,अब दीदी उपर-नीचे हिलने लगी,शायद मेरा लण्ड दीदी को चूत के अन्दर बहुत मजा दे रहा था। दीदी के मुह से अब भी सिसकारी निकल रही थी ……
आह … आह …… बहुत मोटा हे तुम्हारा … आह … आह … हुँ … हुँ … आह … आह
दीदी अब जोर जोर से हिलने लगी, लटकते हुए बोबे आपस मे टकरा रहे थे,मैने उन्है अपने हाथो से कस कर पकड लिया और ऊपर होकर मुह से चूचियां चूसने लगा … दीदी अब भी जोर जोर से हिल रहीं थी
आह …आह … हुँ …… हुँ …… हुँ …… हुँ … आह … आह …
आ आ आ आआआअ …ह हहह्ह ह ह ह ………
करते करते दीदी मेरे सीने पर लेट गयी, उनके बोबे मेरे सीने पर मखमल की गद्दी सा एहसास करा रहे थे,दीदी हाँफ रहीं थीं,उनकी साँसे मेरे को गरमाहट दे रहीं थी। मेरा लण्ड अब भी दीदी की चूत मे खडा था
मै -- दीदी क्या हुआ ?
दीदी -- मजा आ गया … बहुत अच्छा लगा … तुम्हे कुछ नहीं हुआ क्या ?
मै -- अच्छा लग रहा है पहला एहसास हे पर मजा नहीं आया
दीदी --तुम्हारे लण्ड से कुछ नही निकला क्या ?
मै -- नही
दीदी मेरे ऊपर से हट गयी ,मेरा लण्ड अभी खडा था। दीदी ने अपने हाथ से लण्ड को पकड लिया और जोर जोर से सहलाने लगी, मुझे अच्छा लफ़ रहा था … लण्ड गरम हो गया … लण्ड के अन्दर कुछ रौरयाने लगा … लगा कुछ निकलने को दोड रहा हो … एका एक लण्ड मे बहुत तेज मीठा सा दर्द होने लगा,मुझे बहुत अच्छा लगने लगा मेरे मुह से भी आह निकलने लगी
आह सी आह सी आह आह आ आ आ …… ह हह हह हह …………
और मेरे लण्ड से एक गाढा तरल जोर से निकला, उसकी कुछ छींटें दीदी के मुह पर टपक गयीं। मुझे तो मानो जन्नत का एहसास होने लगा … मेरी आँखे बन्द सी हो गयीं,लण्ड के दर्द के आनन्द मे मै खो गया,मन दीदी से चिपकने को करने लगा।
मैने दीदी को अपनी बाहों मे भर लिया उनके बोबो को सीने से चिपका लिया,दीदी से लिपत कर बिस्तर पर लेट गया। लण्ड के आनन्द मे एसा खोया … पता ही नहीं चला कब नींद आ गयी ……………….…….
दीदी मेरे पास आ कर लेट गयी,बोली और करोगे ? मै भला ना क्यू करता, मेरी तो लोटरी निकल गयी थी। दीदी बोली अच्छा अब दूसरी तरह से करेंगे। मै तो सेक्स के समन्दर का नोसिखिया तैराक था, दीदी बताती गयी और मै सेक्स के समन्दर की गहरायियो मे उतरता चला गया।
अब आगे……
मै बिस्तर पर बिलकुल नंगा लेटा था,रेखा दीदी भी मेरे पास आ कर लेट गयी। मै 16 साल का नादान बालक था,उस समय मै सेक्स के बारे मे कुछ भी नहीं जानता था। मुझे लड्के और लड्की के बीच का अन्तर भी नही पता था। हम पोद्दार स्कूल मे पढ्ते थे,जो सिर्फ़ लड्को का ही था,पढाकू बच्चे थे,कडकियो की तरफ़ कभी ध्यान ही नही गया। खैर……
दीदी मेरे पास लेटी थी,मुझे अजीब सा लग रहा था पर अच्छा भी लग रहा था। दीदी एकदम गोरे बदन की थी,शरीर चिकना और चमकदार,बहुत सुन्दर्। दीदी ने मेरे लण्ड की तरफ़ इशारा करके पूंछा…
दीदी -- ये क्या है ?
मै -- छ्न्नू (उस वक्त वो सो रहा था)
फ़िर दीदी अपना हाथ उसपर सहलाने लगी,अचानक वो बढने लगा। मै हैरान था,ऐसा पहले कभी नहीं हुआ,मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। छ्न्नू एकदम तन कर लट्ठ बन गयी थी।
दीदी -- अब बताओ ये क्या हे ?
मै -- छ्न्नू ही तो है
दीदी -- नही … इसे लोन्डा कहते है मतलब लण्ड, ये लड्को की पह्चान हे। अब मेरे वहां हाथ लगा कर देखो क्या हे ?
मैने हाथ लगाया तो दीदी मचल उठी, दीदी नीचे से एक दम गोरी,चिकनी,और मुलायम थी। वहां भूरे भूरे मुलायम बाल भी थे
मै -- दीदी… यहां तो एक लखीर हे,
दीदी -- ये लडकियों की पहचान हे, इसे योनी कहते है मतलब चूत या बुर। ये लडकों की जरुरत होती हे।
दीदी -- अच्छा बताओ तुम्हारे पापा ने तुम्हारी मम्मी से ही शादी क्यू की ?
मै -- पता नहीं
दीदी -- मै बताती हूँ …तुम मेरे ऊपर तो आओ …
मै दीदी के ऊपर उकडू बैठ गया, दीदी ने मुझे थोडा नीचे खिसकाया, फ़िर एक हाथ से मेरा लण्ड पकडा और दूसरे हाथ से अपनी चूत का द्वार खोलकर उस पर लण्ड को सटा दिया।
दीदी -- अब थोदा ऊपर की ओर धक्का मारो
मैने जैसे ही धक्का लगाया, दीदी के मुख से चीख सी निकल गयी, मुझे लगा ……… जैसे … मेरा लण्ड आग की भट्टी मे घुस गया हो … मुझे बहुत ही अच्छा लगा … मेरा लण्ड रेखा दीदी की चूत की गहराइयो मे समा चुका था।
मेरा मुह दीदी के बोबों के ऊपर था, बोबे दूध की तरह एकदम गोरे …… मलाई की तरह चिकने और गुब्बारे की तरह फ़ूले हुए थे, उसपर बडी इलायची सा काला दाना बहुत ही सुन्दर लग रहा था।
मै -- ये क्या हे ?
दीदी -- इसे चूचियां कहते है … इन्हे मुह से चूसा जाता हे
मै -- मै इन्हें चूसूँ ?
दीदी -- हाँ … मगर प्यार से
मेरा लण्ड रेखा दीदी की चूत मै ही घुसा था,मै दीदी के बोबो को मुह मे लेकर चूसने लगा, दीदी तो जेसे मस्त होती जा रही थी,दीदी के मुह से आवाजें आने लगी …
आह … आह … आह … थोडा जोर से चूसो … आह … उई … आह … आह
बोबे एकदम गोलमटोल बौल की तरह थे, मै अपने हाथों से दोनों बोबों को पकड कर बारी-बारी चूस रहा था, दीदी मुझे पीठ पर से सहलाने लगी,अपने चूतर भी हिलाने लगी
बोली …… नीचे लण्ड को भी हिलाओ … उसे ऊपर नीचे हिलाओ … आह … आह … बोबे भी चूसते रहो … आह … आह … मजा आ रहा है … आह … आह … और चूसो … जोर से चूसो … आह … आह
मै अपने लण्ड को ऊपर-नीचे हिलाने लगा,मेरा लण्ड लकडी की तरह कडक हो गया था,चूत की अन्दर की दीवारो पर जा कर टकरा रहा था,बहुत आनन्द आ रहा था। दीदी भी अपने चूतडो को हिला हिला कर पूरा साथ दे रही थी। एकाएक दीदी ने मुझे घुमा दिया,अब मै बिस्तर पर लेटा था और दीदी मेरे ऊपर,मेरा लण्ड अब भी दीदी की
चूत के अन्दर ही था। दीदी के बोबे मेरे ऊपर लटकने लगे, जेसे दो पके आम लटके हों,बहुत ही अच्छे लग रहे थे,मेने उन्हें हाथों से पकड लिया और सहलाने लगा,अब दीदी उपर-नीचे हिलने लगी,शायद मेरा लण्ड दीदी को चूत के अन्दर बहुत मजा दे रहा था। दीदी के मुह से अब भी सिसकारी निकल रही थी ……
आह … आह …… बहुत मोटा हे तुम्हारा … आह … आह … हुँ … हुँ … आह … आह
दीदी अब जोर जोर से हिलने लगी, लटकते हुए बोबे आपस मे टकरा रहे थे,मैने उन्है अपने हाथो से कस कर पकड लिया और ऊपर होकर मुह से चूचियां चूसने लगा … दीदी अब भी जोर जोर से हिल रहीं थी
आह …आह … हुँ …… हुँ …… हुँ …… हुँ … आह … आह …
आ आ आ आआआअ …ह हहह्ह ह ह ह ………
करते करते दीदी मेरे सीने पर लेट गयी, उनके बोबे मेरे सीने पर मखमल की गद्दी सा एहसास करा रहे थे,दीदी हाँफ रहीं थीं,उनकी साँसे मेरे को गरमाहट दे रहीं थी। मेरा लण्ड अब भी दीदी की चूत मे खडा था
मै -- दीदी क्या हुआ ?
दीदी -- मजा आ गया … बहुत अच्छा लगा … तुम्हे कुछ नहीं हुआ क्या ?
मै -- अच्छा लग रहा है पहला एहसास हे पर मजा नहीं आया
दीदी --तुम्हारे लण्ड से कुछ नही निकला क्या ?
मै -- नही
दीदी मेरे ऊपर से हट गयी ,मेरा लण्ड अभी खडा था। दीदी ने अपने हाथ से लण्ड को पकड लिया और जोर जोर से सहलाने लगी, मुझे अच्छा लफ़ रहा था … लण्ड गरम हो गया … लण्ड के अन्दर कुछ रौरयाने लगा … लगा कुछ निकलने को दोड रहा हो … एका एक लण्ड मे बहुत तेज मीठा सा दर्द होने लगा,मुझे बहुत अच्छा लगने लगा मेरे मुह से भी आह निकलने लगी
आह सी आह सी आह आह आ आ आ …… ह हह हह हह …………
और मेरे लण्ड से एक गाढा तरल जोर से निकला, उसकी कुछ छींटें दीदी के मुह पर टपक गयीं। मुझे तो मानो जन्नत का एहसास होने लगा … मेरी आँखे बन्द सी हो गयीं,लण्ड के दर्द के आनन्द मे मै खो गया,मन दीदी से चिपकने को करने लगा।
मैने दीदी को अपनी बाहों मे भर लिया उनके बोबो को सीने से चिपका लिया,दीदी से लिपत कर बिस्तर पर लेट गया। लण्ड के आनन्द मे एसा खोया … पता ही नहीं चला कब नींद आ गयी ……………….…….
14年前