*देवरो ने मिलकर एक साथ चुदाई कर दी..*

*देवरो ने मिलकर एक साथ चुदाई कर दी..*

मेरा नाम कामना है। मैं मध्य प्रदेश में रहती हूँ। मैं बहोत हो स्मार्ट लडकी हूँ। मेरी उम्र अभी 28 साल है। मै बहोत ही खूबसूरत और हॉट लड़की हूँ। मेरी चूत की दीवाने पूरे मोहल्ले के लोग हो गए थे। सारे के सारे मेरी चूत के पीछे ही पड़े रहते थे। मेरे इस बॉम्ब 34- 28- 32 के फिगर पर कई लड़के मरते थे। मैं भी जवान हो चुकी थी। मैंने किसी को मौक़ा नहीं दिया था अपनी चूत फाड़ने का। लेकिंन मेरे कॉलेज के लड़को ने मेरे को चोद कर रंडी बना डाला। मेरा बॉयफ्रेंड मेरे को कई बार चोद कर मेरे को चुदाई की आदत डाल दी। मेरी भी लंड खाने की भूख बढ़ चुकी थी। एक बार मेरे को दो लड़कों ने एक साथ चोदा था। उस दिन से आज तक मैं दो लंड से चुदने को तड़प रही थी। सच कहूँ फ्रेंड्स तो मेरी भूख एक लंड से शांत ही नही होती थी। मेरी शादी अभी दो साल पहले हुई थी। मेरे हसबैंड तीन भाई हैं।

सबसे बड़े मेरे हसबैंड ही हैं। उनका मोटा लंड मेरी चूत की तड़प को शांत कर देता था। मेरे को उनकी अनुपस्थिति बहोत ही बुरी लगती है। मेरे को चुदने के लिए किसी और का सहारा लेना था। मेरी नजर मेरे छोटे देवरो पर पड़ी। उन दोनों में बड़ा 25 साल का और छोटा वाला 21 साल का था। दोनो एक नंबर के हरामी थे। मैंने कई बार उनकी बातें चोरी चुपके सुनी थी। वो दोनों हमेशा लड़कियों के फिगर उनकी चूत के पीछे पड़े रहते थे। हर वक्त उनके दिमाग में लड़कियों के सामान की बात ही चलती थी। मेरे को उन पर उम्मीद थी कि ये दोनों मेरी चूत का रस मौक़ा पाते ही जरूर चखेंगे। मेरे हसबैंड एक बैंक में काम करते थे। जो की मेरे घर से 200 किलोमीटर दूर था। वो वहां पर रूम लेकर रहते थे।

मेरे को उनके न होने की कमी महसूस होती थी। रात में जब चूत खुजलाती थी तो उंगली कर काम चला रही थी। मेरे को एक आईडिया आया क्यों न अपने देवरो को पटा लिया जाये। मैने उसी दिन से उनके सामने अपना हॉट सेक्सी चेहरा पेश करने लगीं। मेरा बड़ा वाला देवर जिसका नाम कौशल था। वो कद में लंबा था। वो काफी मोटा तगड़ा था। उसकी पर्सनॉलिटी बहोत ही लाजबाब थी। मेरा छोटा देवर रवींद्र भी कुछ कम नही था। वो भी काफी स्मार्ट था। मेरे को दोनों को देखकर चुदने का मन करने लगता था। वो दोनों मेरे को भाभी भाभी कहते रहते थे। मेरे को उनका लंड देख कर लालच लग रही थी। मैंने दोनों को पटाने का बहाना निकाला। ससुर जी कही बाहर गए हुए थे। सासू माँ भी उनके साथ चली गयी। जाते जाते उन्होंने मेरे देख रेख की जिम्मेदारी उन कमीनो लड़को पर छोड़ गए थे।

वो दोनो दिन में सोफे पर बैठकर मेरे ही फिगर की तारीफ़ कर रहे थे। मैं पास में ही झाडू लगा कर उनकी सारी बाते सुन रही थी।
कौशल: रवींद्र भाई भाभी जैसी माल मिल जाए सम्भोग के लिए तो किस्मत खुल जाए
रवींद्र: कही न मिली उनके जैसे तो हम लोगों की किस्मत ही बंद रहेगी
कौशल: क्यों न हम लोग भाभी को ही चोद दे
रवींद्र: हॉ यार मेरे को भी यही आइडिया आया था। लेकिन भाभी मानेंगी तब ना
कौशल: चल भाई भाभी को पटाया जाये


मै सामने ही खड़ी थी। मेरे को देखकर दोनों चौक गए। मेरे हाथ में झाड़ू देखकर वो दोनों डर गए। उनको लगा मै उनको कही झाड़ू से मार ना दूं। वो दोनों वहाँ से चुपचाप चले गए। मेरे को बहोत प्रसन्नता हो रही थी। आज अपनी चुदाई के बारे में कई दिनों बाद सुन रही थी। मेरी चूत में बहोत तेज से खुजली होने लगी। रात को खाना खाते वक्त दोनो मेरे से शर्म कर रहे थे। मेरे सामने वो दोनो अपना सिर झुकाए बैठे थे। मैंने उनका शर्म दूर करने के लिए उनके पास बैठकर बात करने लगी। वो दोनों मेरे से कुछ बोल ही नहीं पा रहे थे। मैंने उनके कंधे पर हाथ रख कर उनके बीच में बैठ गयी।

मै: क्या तुम दोनों ने अभी तक चूत के दर्शन को तरस रहे हो?
रवींद्र: भाभी हम दोनो तो मजाक कर रहे थे
मै: तुम मेरे साथ क्या सच में सेक्स करना चाहते हो?
कौशल: भाभी मै तो मजाक कर रहा था। आप सिरियस हो गयी

मै: तुम लोग मेरे को भाभी भाभी कहना बंद करो। मेरे को तुम अपना फ्रेंड मानो
कौशल: एक ही शर्त पर!
मै: क्या शर्त है तुम्हारी?
कौशल: हम लोग तुम्हे अपनी गर्लफ्रेंड की तरह रखेंगे। मंजूर हो तो हां करना
मै: हाँ मेरे को मंजूर है

हम लोगो ने उस रात देर तक बात की। उस रात घर पर सास ससुर नहीं थे। हमने साथ ही सोने का फैसला किया। दोनों मेरे साथ मेरे बिस्तर पर सोने आ गए। मैंने दूसरे कमरे में जाकर खूब मेकअप किया। अपने होंठो को सजाकर काले रंग की नाइटी पहन कर एकदम हॉट माल बनकर आ गयी। वो दोनों मेरी तरफ और भी ज्यादा आकर्षित हो रहे थे। मेरे को घूर घूर कर देख रहे थे। मेरे को वो दोनों बीच में लिटाने के लिए जगह खाली कर दिए। मैं बीच में लेट गयी। दोनों मेरी तरफ अपना मुह करके मेरे से बात करने लगे।

रवींद्र: क्या बात है भाभी आज तो तुम बहोत ही हॉट लग रही हो
मै: क्या करूं इस हॉट बॉडी का! मेरी जवानी का कोई मजा लूटने वाला भी तो कोई नहीं है
कौशल(हँसते हुए): हम लोग तो हैं! इसका मजा लेने के लिए
मै: तो लूट लो आज मेरी जवानी का मजा!
रवींद्र: आज भाभी मेरे को मूड में लग रही है। चलो भाभी की तड़प को आज शांत किया जाए

कौशल: पहले भाभी की अनुमति तो ले लो!
मै: सालों बात ही करोगे की कुछ करोगे भी!
कौशल: रवींद्र भाई चल अपने काम लग जाते थे। भाभी को गर्म करते हैं
मै: ठीक है जो भी करना जल्दी करो!

वो दोनों भाई काम पर लग गए। रवींद्र मेरे पेट पर अपना हाथ रखकर सहला रहा था। कौशल मेरी चूत के ऊपर अपना हाथ चला रहा था। उसका हाथ लंबा था। मेरी चूत को वो अच्छे से मसल रहा था। मैने अपना हाथ दोनो के लंड पर रख दिया। दोनों का लंड एक से बढ़कर एक लग रहा था। कौशल का लंड रवींद्र के लंड से बड़ा था। रवींद्र मेरे को अपने तरफ खीचते हुए मेरा मुह अपनी तरफ कर लिया। मेरे सजे होंठो को देखकर अपनी जीभ लपलपाते हुए मेरी तरफ देख रहा था। मेरी होंठ पर उसने अपने होंठ को लगाकर किस करते हुए चूसने लगा। मेरे नाजुक नर्म होंठो का पूरा मजा लेकर वो अपनी प्यास बुझा रहा था। किस्मत तो आज उनकी खुली थी। उनको मेरे साथ सम्भोग करने का मौका जो मिला था। मेरे कंधे से नाइटी को सरकाते हुए कौशल मेरे कंधे को किस कर रहा था। दोनों मेरे को दुगनी स्पीड से गर्म कर रहे थे। मेरे को बहोत ही मजा आ रहा था। आज कई वर्षो बाद मेरे को दो लंड से एक साथ चुदवाने का मौका मिला था। कौशल मेरी चूत में उंगली डालने लगा। मैंने कौशल के हाथ को पकड़ कर जल्दी जल्दी चूत में ऊँगली करवाने लगी। मेरी होंठो को काट काट कर मेरे से रवींद्र “……अई.. .अई….अई……अई….इसस्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिसकारियां निकलवा रहा था। दोनों के पास चुदाई करने का बहोत ज्यादा अनुभव लग रहा था। वो दोनों मेरे को नोच नोच कर मजा ले रहे थे। कौशल मेरी गांड पर टांग रख कर जोर से मेरे मम्मो को दबाने लगा। मेरे बड़े बड़े फुटबॉल जैसे मम्मो को उछाल कर दबा रहा था। रवींद्र ने मेरे होंठो को पीना बंद कर दिया।

आगे से उसनें मेरी नाइटी को निकाल दिया। पीछे से खींचकर कौशल ने मेरी नाइटी निकाल दी। मैं अपने बड़े बड़े खूबसूरत सूरत संगमरमर के पत्थर जैसे मम्मो को ब्रा में कैद किये हुई थी। कौशल मेरी ब्रा की हुक को खोलकर निकाल दिया। मैं उन दोनो के बीच सिर्फ पैंटी मेंही लेटी हुई थी। मेरे मम्मो को आजाद होते ही रवींद्र ने अपने हाथों में भर लिया। उसने मेरे दोनो दूध को एक एक करके पी ही रहा था कि कौशल ने मेरी टांग पकड़ कर अपनी तरफ खीच लिया। मेरी कमर तक का भाग रवींद्र की तरफ था। कमर के नीचे का पूरा पार्ट कौशल ने अपनी तरफ कर रखा था। कौशल ने मेरी पैंटी को फाड़कर निकाल दिया। मैं नंगी हो गयी। मेरी रसीली चूत को देखकर कौशल के मुह में पानी आ गया। उसने अपनी जीभ निकाल कर मेरी चूत पर लगा दिया। अपनी खुरदुरी जीभ लगा लगा कर मेरी चूत चाटने लगा। मै जोर जोर से “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ… .आहा …हा हा हा” की सिसकारियां भरने लगी। मेरे को दोनों बहोत ही ज्यादा तड़पा रहे थे। रवींद्र ने कुछ देर तक मेरे दूध को पिया। उसके बाद उसने अपना पैजामा निकाल दिया।

अंडरबियर में उसका लंड खड़ा हुआ दिख रहा था। उसने नंगा होकर अपना लंड मेरी होंठो से लगाने लगा। मैंने भी धीरे से अपनी जीभ निकाल कर उसके लंड को चाट लिया। रवींद्र अपना लंड मेरे मुह में ही घुसाकर जोर जोर से अंदर बाहर करने लगा। मैं भी उसका लंड खूब मजे ले ले कर चूस रही थी। मेरी चूत को चाट चाट कर कौशल ने लाल लाल कर दिया। कौशल अपने कपडे ही निकाल रहा था कि रवींद्र ने मेरा काम लगा दिया। वो मेरी टांगो को फैलाकर अपना लंड मेरी गर्म चूत पर रगड़ रहा था। कौशल भी अपना कपड़ा निकाल कर अपना मोटा लंड मेरी तरफ बढ़ा रहा था। मेरे मुह पर अपना लंड रखकर वो भी चुसवाने लगा। रवींद्र अपना लंड मेरी चूत के छेद से सटाकर जोर से धक्का मार दिया।

उसका लंड मेरी चूत में घुस गया। मैं जोर से “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” की आवाज निकाल कर चीखने लगी। उसने पूरा लंड घुसाकर मेरी चुदाई करने लगा। कौशल भी मेरे मुह को ही चूत समझ कर चोदने लगा। वो जल्दी जल्दी अपना लंड मेरे गले तक पेल रहा था। मेरे को बहोत मजा आ रहा था। कौशल ने मेरे मुह से लंड निकाल लिया। मै उसके लंड को हाथो से मसाज दे रही थी। रवींद्र मेरे को जोर जोर से अपनी कमर उठा उठा कर चोद रहा था। मैंने भी अपनी गांड उठा दी। वो और भी तेजी से मेरी चुदाई करने लगा। मेरे को कौशल का लंड अपनी चूत में घुसवाने का मन करने लगा। मैंने रवींद्र से अपनी चूत छुड़ाकर कौशल की तरफ कर दी। कौशल में मेरे को बिस्तर पर घोड़ी बना दिया। रवींद्र अपना लंड मेरे मुह के सामने करके चटवाने लगा। मेरी चूत ने उसका लंड गीला कर दिया था।

मै उसके गीले लंड को चाट ही रही थी की कौशल ने अपना घोड़े जैसा लंड मेरी चूत में घुसाने लगा। मेरी चूत में उसका लंड घुसते ही एक बार फिर मेरी मुह से “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” की चीख निकल पड़ी। मेरी कमर को पकड़ कर वो जोर जोर से चोदने लगा। इधर रवींद्र के लंड पकड़कर मुठियाते हुए मैंने उसके लंड को स्खलित करा दिया। उसका सारा माल मेरे चेहरे पर गिर चुका था। बूँद बूँद करके बिस्तर पर टपक रहा था। रवींद्र का लंड खाली हो गया था। वो एक किनारे बैठकर चुदाई को देखकर मजा ले रहा था। कौशल मेरी कमर को दबाकर मेरी चुदाई कर रहा था।

मेरे गांड पर हाथ मार मार कर वो जोर जोर से मेरी चूत फाड़ रहा था। मै भी अपनी कमर को हिला हिला कर जोर जोर से “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..” की आवाज निकाल कर चुदवा रही थी। लगातार लंड की रगड़ से मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया। कौशल का लंड भीग चुका था। भीगे लंड से जोर जोर से मेरी चुदाई करने लगा। मेरे झड़ने के करीब 10 मिनट बाद कौशल ने भी अपना लंड मेरी चूत से निकाला। जोर जोर से मुठ मारते हुये अपना लंड मेरे मुह के सामने किये हुए था। कुछ देर बाद उसके लंड ने पिचकारी छोड़ दी। मैंने अपना मुह खोल रखा था। उसका सारा माल मेरी मुह में भर गया। मै एक बार में सारा माल गटक गयी। कौशल और रवींद्र दोनों एक साथ बैठ गए। रात में वो दोनों बारी बारी मेरी चुदाई की। आज भी मौक़ा पाते ही मेरे को वो जरूर चोदते हैं।
発行者 happy7869
8年前
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