main november 2016 ke samay se hi patna aa gai hun. main yah soch kar dilli se patna aai ki mera case khatam ho jayega. mai case jeet jaungi. mere Vakil ne bhi yahi kaha tha aur bola ki dilli se yahi aa jao do mahine me case khatam ho jayega. vakil har dusre tisare din mujhe apne room par le jakar kas kas kar chodta hai. aur bolta tha ki case tum jit rahi ho aur tumko pati ke jaydad me hissa mil jayega. main bhi yahi soch kar jab vakil apne room par bulata mai dopahar ya sham ko chali jati hu. vakil apne rum par akele hi rahta hai. vah mujhe apne rum par le jakar khoob nanga karke tel lagaa la 続きを読む
बकरी चराने का मजा
ये उन दिनों की बात है जब मैं अपने मायके में रहती थी और जवान हो गयी थी, सबकुछ समझने लगी थी। औरत और मर्द के हर रिश्ते को जान चुकी थी। गरीबी घर में पैदा हुयी थी इस लिये घर में बकरियाँ भी थी जिसे मेरी बहन चराने ले जाती थी। क्योंकि मां अक्सर दसरे के घरों में काम करने जाती थी। बड़ी बहन के साथ साथ कभी मैं भी जाती थी। कुछ दिन पहले ही बड़ी बहन की शादी तय हुयी थी लेकिन न जाने क्यों शादी टूट गयी। फिर माँ खुब दीदी को गाली दी। मैं समझ नहीं पायी। फिर माँ ने दीदी को बोली कि बकरी चराने नहीं जाना है। बकरी चराने का काम मुझे मिल गया। मेरे पास कुल चार बकरियाँ थी। दोपहर बाद मैं बकरी चराने जाने लगी। माँ बोली कि 続きを読む
मेरी सच कथा meri sach kathaa
पोस्ट नं . 1 आज मैं अपने जीवन के कहानी की शुरआत करती हूँ अपने जन्म से. मैं १ अप्रैल १९८५ में पटना के पास एक गांव में पैदा हुई . मैं जात की पटेल हूँ जिसे कुर्मी कहते हैं . मेरे पिता जी खेती का काम करते हैं. मेरी माँ घर का काम करती है . मैं दो बहने और एक भाई हैं. मैं दूसरे नंबर पर हूँ . सबसे बड़ी मेरी बहन है और सबसे छोटा मेरा भाई. मेरी बहन मुझसे दो साल बड़ी है . मेरा पूरा परिवार गांव में ही रहता है. मेरे पिता जी काफी सीधे साधे इंसान है. घर में मेरी माँ का ही चलता है. यानि घर में वही होता है जो मेरी माँ कहती है . मेरी बड़ी बहन केवल हाईस्कूल तक की पढाई की और मैं बी ए तक पढ़ी हूँ. 続きを読む
गांव का बगीचा (यादें -१ )
ये मेरे जीवन के कुछ यादगार बातें हैं, जिन्हे मैं अक्सर याद करके अपने पुराने अतीत को अपने मन में ताजा कर लेती हूँ. ये वो पुरानी यादें हैं जिन्हे मैं अपने दिल में हमेशा ताजा रखना चाहती हूँ. इन बातों में से कुछ बातें मैं आपसे भी बाँटना चाहती हूँ. मैं गांव की रहने वाली हूँ. एक किसान के बेटी हूँ. गांव में पैदा हुई. गांव में खेली, गांव में घुमी और गांव में बड़ी हुई. इसलिए मेरी खून और रोवें में गांव की खुशबू महकती रहती है. ये उस समय की बात है जब मेरी शादी नहीं हुई थी. लेकिन मैं जवान हो चुकी थी. मेरे गांव के बगल में ही एक बगीचा है. जिसमे मैं जब छोटी थी तो खेलने जाती थी. बगीचा बड़ा था और बगीचे के 続きを読む